बरसात में नर्क बना डेयरी काम्पलैक्स, गंदगी में ही निकाला जा रहा दूध, पशुपालक बोले- आत्मदाह की अनुमति दो!

Edited By Deepak Kumar, Updated: 09 Sep, 2025 04:07 PM

poor condition of dairy complex during rainy season cattle breeder sad

दडवा डेयरी काम्पलैक्स किसी नर्क से कम नहीं है। न पशुओं के लिए न पशुपालकों के लिए यहां कोई बैठने का, चलने फिरने का कोई स्थान बचा है और न ही यहां बाहर से आने वाले के लिए कोई सुरक्षित रास्ता है।

यमुनानगर: बरसात में और बरसात के बाद यदि किसी को नर्क देखना हो तो नगर निगम द्वारा बनाए दडवा डेयरी काम्पलैक्स को देख ले। इन दिनों यह डेयरी काम्पलैक्स किसी नर्क से कम नहीं है। न पशुओं के लिए न पशुपालकों के लिए यहां कोई बैठने का, चलने फिरने का कोई स्थान बचा है और न ही यहां बाहर से आने वाले के लिए कोई सुरक्षित रास्ता है। बार-बार नगर निगम के साथ-साथ सरकार को इस ओर ध्यान देने की गुहार लगाने के बाद भी इस और किसी का ध्यान नहीं गया और हालात बद से बदतर हो गए। अब तो पशुपालक यहां से पलायन करने का मन बना रहे हैं, क्योंकि न यहां कोई सुविधा है और न ही किसी प्रकार की सुविधा की कोई भविष्य में उम्मीद। ऐसे में पशुपालक चाहते हैं कि या तो यहां की स्थिति में सुधार लाया जाए या फिर इन आत्मदाह की अनुमति दी जाए।

डेयरी काम्पलैक्स में डेयरी शिफ्ट करने वाले पशुपालक कुलदीप मेहता, भल्ला, सोनू, जग्गा, सतपाल मेहता, जितेंद्र लांबा, संजय पाहवा तथा अन्य ने बताया कि करीब एक दशक पहले उन्होंने शहर से अपने डेरियां यहां शिफ्ट की थी। नगर निगम ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उन्हें हर प्रकार की सुविधा व जरूरत का समान यहां उपलब्ध करवाया जाएगा, लेकिन यहां आने के बाद उन्हें पूछा नहीं गया।

पशुपालकों का कहना था कि अब तो इनके पशु दलदल में बैठने को मजबूर हैं। न पानी की निकासी का कोई इंतजाम है न गोबर मूत्र की। गोबर की दलदल में ही पशु बैठे हैं और वहीं बैठकर पशुपालकों को भी उनका दूध निकालना पड़ रहा है। कई पशुपालक चर्म रोग के शिकार हो चुके हैं। पशुओं को देखने के लिए कोई डॉक्टर तक नहीं आता क्योंकि यहां तक पहुंचाने का कोई रास्ता ही नहीं बचा है। पशुओं के लिए यदि चारे की जरूरत पड़ती है तो कोई चारे वाला यहां नहीं पहुंचता।

ऐसे में कोई भी व्यक्ति सहज ही उनकी हालत का अंदाजा लगा सकता है। बार-बार निगम के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को इस बारे लिखा व मौखिक रूप से कहा जा रहा है। हर बार केवल आश्वासन ही मिल रहा है। पशुपालकों का कहना है कि जिस दिन वह बगावत पर आए तो नगर निगम को भी भारी पड़ेंगे और शासन प्रशासन को भी। बरसात के बाद भी निकासी का कोई इंतजाम नहीं है चारों ओर कीचड़ तथा दलदल है। पशुपालकों की मांग है कि कम से कम एक बार आकर उनके परिसर को देखा तो जाए की इनके पशु व यह खुद किस हालत में रह रहे हैं।

जल्द ही सकारात्मक कार्रवाई होगी: मेयर 

इस संबंध में नगर निगम की मेयर सुमन बहमनी का कहना कि जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक कार्रवाई होगी। इस संबंध में उन्होंने अधिकारियों की बैठक भी ली है और उन्हें दिशा-निर्देश जारी कर कहा कि डायरी परिसर के हालत सुधारे जाए। सुमन ने बताया कि जल्द ही इस दिशा में कार्य होगा सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

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