मानेसर जमीन घोटाला: भूपेंद्र हुड्डा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू करने के लिए गवाहों को नोटिस जारी

Edited By Manisha rana, Updated: 04 Jan, 2026 10:42 AM

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मानेसर जमीन घोटाले में पंचकूला स्थित सी.बी.आई. कोर्ट में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा सहित एच. एस. वी. पी. (पूर्व में हुडा) के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों और निजी बिल्डरों के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत...

पंचकूला : मानेसर जमीन घोटाले में पंचकूला स्थित सी.बी.आई. कोर्ट में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा सहित एच. एस. वी. पी. (पूर्व में हुडा) के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों और निजी बिल्डरों के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप तय हो गए हैं। सी.बी. आई. कोर्ट ने मामले में ट्रायल शुरू करने के लिए अभियोजन पक्ष के गवाहों को नोटिस जारी कर दिए हैं। इस बहुचर्चित मामले में पहली गवाही 2 मार्च को दर्ज की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इस केस में नामजद 2 आरोपियों अतुल बंसल और सुरजीत सिंह का निधन हो चुका है, जिस कारण उनके खिलाफ कार्रवाई पहले ही समाप्त की जा चुकी है। सी.बी.आई. ने इस प्रकरण में 2 फरवरी 2018 को चार्जशीट दाखिल की थी जिसके लगभग 7 वर्ष बाद अब जाकर गवाही की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। 

क्या है मानेसर जमीन घोटाला

27 अगस्त, 2004 को तत्कालीन इनैलो सरकार ने गुरुग्राम जिले के मानेसर, लखनौला और नौरंगपुर गांवों की 912 एकड़ भूमि पर इंडस्ट्रियल मॉडल टाऊनशिप (आई.एम.टी.) विकसित करने के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु धारा-4 के तहत अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और कांग्रेस सरकार बनने पर भूपेंद्र हुड्डा मुख्यमंत्री बने। आरोप है कि इसके पश्चात आई.एम.टी. परियोजना को रद्द कर सार्वजनिक प्रयोजन का हवाला देते हुए भूमि अधिग्रहण के लिए धारा-6 का नोटिस जारी किया गया। 

धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले हुए थे दर्जी

2014 में हरियाणा में भाजपा सरकार बनने के बाद इस मामले में कई एफ.आई.आर. दर्ज की गई। इसके बाद सी. बी. आई. ने 17 सितम्बर 2015 को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा, तत्कालीन हुडा अधिकारियों और निजी बिल्डरों के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के आरोपों में एफ.आई.आर. दर्ज की। सी.बी.आई. की जांच रिपोर्ट में आरोप है कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हुड्डा ने किसानों की कीमती जमीनें बेहद कम दामों पर निजी बिल्डरों को बिकवाने में भूमिका निभाई जिससे बिल्डरों को 1500 करोड़ रुपए से अधिक का लाभ हुआ। इसके अतिरिक्त अलग-अलग शिकायतों के आधार पर हुड्डा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ करीब 5 एफ. आई. आर. दर्ज की गई थीं।

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