Edited By Isha, Updated: 15 Jun, 2024 05:57 PM
दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को पानी की सप्लाई डाइवर्ट करने वाले यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज के गेट में लीकेज हो रही है। गेट नंबर आठ में हो रही लीकेज के कारण यह गेट क्षतिग्रस्त हो सकता है।
चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी): दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को पानी की सप्लाई डाइवर्ट करने वाले यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज के गेट में लीकेज हो रही है। गेट नंबर आठ में हो रही लीकेज के कारण यह गेट क्षतिग्रस्त हो सकता है। इसका विपरीत असर बैराज की नींव पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों की टीम लीकेज को रोकने का प्रयास कर रही है।
मानसून से पूर्व इस लीकेज को ठीक करना पड़ेगा। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता विजय गर्ग ने बताया कि जैसे ही बैराज में गेट में के अंदर लीकेज का पता चला, सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। जिसके बाद विभाग के चीफ इंजीनियर, सेफ्टी ऑफिसर सहित अन्य अधिकारियों ने मौके का दौरा किया और तुरंत इसकी लीकेज बंद करवाने के लिए आदेश दिए। इसके बाद मुंबई की एजेंसी को ठेका दिया गया । जिसने लीकेज बंद करने का कार्य शुरू कर दिया है। और अभी तक 50% लीकेज को रोकने में सफलता हासिल कर ली है।
यमुनानगर में स्थित हथिनी कुंड बैराज कभी दिल्ली हरियाणा में बाढ़ की स्थिति आने, कभी दिल्ली को कम पानी सप्लाई होने को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है। लेकिन आज हम बात कर रहे हैं बैराज के गेट में लीकेज होने की। जिसके चलते आने वाले समय में बैराज को भारी नुकसान हो सकता था। लेकिन समय रहते लीकेज का पता लग गया। बैराज पर स्टड ठीक करने का कार्य चल रहा है। इसी कार्य के दौरान गेट नंबर आठ पर लीकेज का खुलासा हुआ। जिसके बाद संबंधित विभाग ने इसे ठीक करवाने के लिए मुंबई के विशेषज्ञों की टीम से संपर्क किया।
49 लाख रुपए का ठेका दिया
इसे ठीक करने के लिए टीम को 49 लाख रुपये का ठेका दिया गया है। टीम पिछले पांच दिनों से यहां मरम्मत कार्य कर रही है। इस दौरान यहां बैराज के नीचे पानी के अंदर बनाए गए लेप से पानी की लीकेज को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। बहरहाल मुंबई की टीम ने इस कार्य को पूरी तरह से ठीक करने के लिए सिंचाई विभाग से 15 दिन का समय मांगा है। मानसून से पूर्व इस लीकेज को ठीक करना पड़ेगा। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता विजय गर्ग ने बताया कि जैसे ही बैराज में गेट में के अंदर लीकेज का पता चला, सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। इसके बाद विभाग के चीफ इंजीनियर, सेफ्टी ऑफिसर सहित अन्य अधिकारियों ने मौके का दौरा किया और तुरंत इसकी लीकेज बंद करवाने के लिए आदेश दिए। इसके बाद मुंबई की एजेंसी को ठेका दिया गया । जिसने लीकेज बंद करने का कार्य शुरू कर दिया है। और अभी तक 50 फीसदी लीकेज को रोकने में सफलता हासिल कर ली है।
बैराज से होता है पानी का बंटवारा
हथिनीकुंड बैराज की सीमाएं कई राज्यों से लगती हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का कुछ हिस्सा शामिल है। बैराज का निर्माण 1996 से 1999 के बीच सिंचाई के उद्देश्य से किया गया था। हथिनीकुंड बैराज से पहले यमुना पर ताजेवाला हेड था। जिसका निर्माण 1873 में किया गया था। हालांकि यह अब सेवा में नहीं है। ताजेवाला हेड से ही यमुना के पानी का बंटवारा होता था। अब यमुना के पानी का बंटवारा हथिनीकुंड बैराज से होता है। बैराज से ताजेवाला हेड की दूरी लगभग 3-4 किमी है। हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में पानी छोड़े जाने के लगभग 72 घंटे बाद पानी दिल्ली में दाखिल होता है। बैराज से दिल्ली के बीच मुख्य रूप से हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत शहर एक तरफ पड़ते हैं और वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, बागपत और मेरठ का कुछ हिस्सा पड़ता। तब जाकर यमुना दिल्ली में प्रवेश करती है।
नीचे जा रहा रिवर बेड
हथिनीकुंड बैराज में लीकेज हुई है लेकिन इससे पहले भी कई बार हथिनी कुंड बैराज में दिक्कत पैदा हो चुकी हैं। बैराज के रिवर बेड 15 से 20 मीटर नीचे जा चुका है। वहीं बैराज के आसपास लगाए गए स्टड भी पिछले कुछ वर्षों में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। बैराज की लगातार मरम्मत न होने के चलते कई परेशानियां पैदा हो चुकी हैं । कहां यह भी जा रहा है की मात्र 24 वर्ष पहले हुए निर्माण के बाद हथनीकुंड बैराज में कई तरह की परेशानियां हैं, जबकि ताजेवाला हेड वर्क्स ने 125 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी थी ।