Haryana: हाईकोर्ट ने सब-इंस्पैक्टर भर्ती विवाद को किया खत्म, याचिका खारिज

Edited By Manisha rana, Updated: 25 Jan, 2026 02:54 PM

high court ends sub inspector recruitment dispute dismisses petition

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पैक्टर भर्ती से जुड़े एक विवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें चयन प्रक्रिया की उत्तर-कुंजी को चुनौती दी गई थी।

चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पैक्टर भर्ती से जुड़े एक विवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें चयन प्रक्रिया की उत्तर-कुंजी को चुनौती दी गई थी। जस्टिस जगमोहन बंसल की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि जब चयन आयोग ने विशेषज्ञों की राय के आधार पर उत्तर-कुंजी तय की है और उसमें कोई स्पष्ट त्रुटि सिद्ध नहीं हुई है तो अदालत उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।

इस मामले में याची अमित ने विज्ञापन संख्या 3/2021 तहत हुई सब-इंस्पैक्टर भर्ती परीक्षा की 3 प्रश्नों की उत्तर-कुंजी पर सवाल उठाए थे। परीक्षा प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण, शारीरिक माप और दस्तावेजों की जांच शामिल थी और मैरिट लिखित अंकों, अतिरिक्त योग्यता तथा सामाजिक-आर्थिक मानदंडों के आधार पर तैयार की जानी थी।

अमित ने 26 सितम्बर 2021 को हुई लिखित परीक्षा में भाग लिया था। बाद में जारी उत्तर कुंजी पर आपत्तियां मांगी गई थीं लेकिन उस समय उसने कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाई। उसे बाद में चयनित भी कर लिया गया था और उसके कुल अंक 67.20 थे जिनमें 5 अंक सामाजिक-आर्थिक श्रेणी के थे। बाद में जब शिकायतों के आधार पर दस्तावेजों की जांच हुई तो सामने आया कि अमित के पिता दिल्ली पुलिस में कार्यरत थे। इसके बावजूद उसने शपथ-पत्र देकर यह दावा किया था कि उसके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है। इसी आधार पर उसके 5 अंक काट दिए गए और वह कट आफ से नीचे चला गया।

इसके बाद अमित ने 3 सवालों हरियाणा के पूर्व डी.जी.पी. की मृत्यु, गेहूं बोने का तापमान और अनुच्छेद 370 हटाने की तारीख पर उत्तर-कुंजी को गलत बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने कहा कि पहले प्रश्न में आयोग का उत्तर सही है, दूसरे प्रश्न में यह एक तकनीकी विषय है जिसमें विशेषज्ञों की राय को बदला नहीं जा सकता और तीसरे प्रश्न में संसद ने 5 अगस्त 2019 को संशोधन पारित किया था, जबकि राष्ट्रपति की अधिसूचना 6 अगस्त को आई, इसलिए 5 अगस्त को सही माना गया।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि उत्तर-कुंजी को केवल तब ही बदला जा सकता है जब वह स्पष्ट रूप से गलत सिद्ध हो, अन्यथा चयन संस्था की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। चूंकि अमित की याचिका में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं था और उसने स्वयं गलत सामाजिक आर्थिक लाभ- लिया था, इसलिए याचिका खारिज कर दी गई।


 

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