एवरेस्ट छूने वाली हरियाणा की बेटी को नहीं मिला मान सम्मान, मात्र 20.5 घंटे में फहराया था तिरंगा

Edited By Isha, Updated: 18 Apr, 2025 01:21 PM

haryana s daughter who touched everest did not get respect

हरियाणा के हिसार जिले के छोटे से गांव बालक की बेटी रीना भट्टी ने पर्वतारोहण की दुनिया में इतिहास रच दिया है। एक ट्रैक्टर मिस्त्री की बेटी होने के बावजूद, रीना ने वह कर दिखाया जिसे करने का सपना भी हर कोई

हिसार (विनोद सैनी):  हरियाणा के हिसार जिले के छोटे से गांव बालक की बेटी रीना भट्टी ने पर्वतारोहण की दुनिया में इतिहास रच दिया है। एक ट्रैक्टर मिस्त्री की बेटी होने के बावजूद, रीना ने वह कर दिखाया जिसे करने का सपना भी हर कोई नहीं देख पाता। मात्र 20.5 घंटे में माउंट एवरेस्ट और ल्होत्से की चोटी पर तिरंगा फहराने वाली वह भारत की सबसे तेज महिला पर्वतारोही बन गई है। बावजूद इसके, उन्हें राज्य सरकार की तरफ से अब तक वह मान-सम्मान और सहयोग नहीं मिला जिसकी वह हकदार हैं।

हिमपुत्री के नाम से जानते हैं लोग

रीना को लोग हिमपुत्री के नाम से जानते हैं। पिछले पांच सालों में वे 20 से अधिक चोटियों को फतह कर चुकी हैं, कई ऐसी जो भारतीय महिलाओं के लिए पहली बार थीं। ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स तक में उनका नाम दर्ज है। 15 अगस्त, 2022 को उन्होंने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत मात्र 24 घंटे में माउंट एल्ब्रस की दोनों चोटियों पर विजय पाई, ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला हैं। किर्गिज़स्तान की स्नो लेपर्ड पीक (पीक लेनिन), माउंट कांग यत्से, माउंट डज़ो जोंगो और नेपाल की तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माउंट अमा डबलम जैसी चोटियों पर भी उन्होंने अपने झंडे गाड़े हैं, वो भी रिकॉर्ड समय में।

ट्वीट कर रीना भट्टी ने सरकार से लगाई गुहार

वीरवार को मुख्यमंत्री , खेल मंत्री और अन्य के नाम पत्र लिखकर और ट्वीट कर रीना भट्टी ने सरकार से ए ग्रेड की नौकरी और आर्थिक मदद की गुहार लगाई है| अपनी कहानी साझा करते हुए रीना भट्टी ने कहा कि लड़कियाँ सिर्फ़ सपने नहीं देखतीं, बल्कि उन्हें पूरा करने की हिम्मत भी रखती हैं। मैंने लगातार कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं और भारत का नाम गर्व से ऊँचा किया है। मैंने माउंट एवरेस्ट (दुनिया की सबसे ऊँची चोटी) और माउंट ल्होत्से (चौथी सबसे ऊँची चोटी) को केवल 20.5 घंटे में एक साथ 2024 में फतेह कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और भारत की सबसे तेज़ महिला पर्वतारोही बन गई उन्होंने बताया।

माउंट आमा दबलम को भी सिर्फ़ 5 दिनों में चढ़ा

हर घर तिरंगा अभियान" के अंतर्गत 15 अगस्त 2022 को यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस (पश्चिम – 5642 मीटर, पूर्व – 5621 मीटर) को दोनों दिशाओं से 24 घंटे में फतेह कर तिरंगा लहराया। इसके साथ ही वह भारत की पहली महिला बनीं जिन्होंने स्नो लेपर्ड पीक – पीक लेनिन (7134 मीटर), किर्गिस्तान में फतेह किया। उन्होंने आगे कहा, “मैं हरियाणा राज्य की पहली महिला बनी जिसने माउंट कांग यात्से (6270 मीटर) और माउंट जो जोंगो (पश्चिम) (6240 मीटर) को 70 घंटों में फतेह किया और दोनों चोटियों पर तिरंगा लहराया। इसके अलावा, मैंने दुनिया की सबसे तकनीकी चोटी माउंट आमा दबलम (6812 मीटर) को भी सिर्फ़ 5 दिनों में चढ़ा, जो नेपाल में स्थित है।

नायब सिंह सैनी से की ये अपील

उन्होंने बताया कि वह “Depression Against Running” नामक विश्व की सबसे लंबी रिले दौड़ में शामिल हुईं और ऑक्सफ़र्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में 10,000 पुश-अप्स पूरा करने के लिए नाम दर्ज करवाया। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी से अपील करते हुए, रीना भट्टी, जो कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री धारक हैं, ने कहा: "मैंने माउंट एवरेस्ट को फतेह करने के दौरान अनेक कठिनाइयों का सामना किया। 2023 में पहली बार माउंट एवरेस्ट मिशन की शुरुआत की थी लेकिन तकनीकी और मौसम की परेशानियों के कारण मुझे एवरेस्ट की चोटी से सिर्फ़ 50 मीटर पहले लौटना पड़ा। यह घटना मेरे लिए एक बुरे सपने जैसी थी। लेकिन समाज और परिवार के सहयोग से मुझे दोबारा हिम्मत मिली। मई 2024 में मैंने एवरेस्ट और ल्होत्से को लगातार 20.5 घंटों में चढ़कर एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। साथ ही अब तक मैं 20 से ज्यादा चोटियाँ फतेह कर चुकी हूँ जो किसी भी लड़की के लिए एक अद्वितीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।

सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता की मांग

उन्होंने कहा मेरी सरकार से विनम्र अपील है कि मेरी उपलब्धियों को देखते हुए मुझे ए ग्रेड की सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। मैंने राज्य और देश का नाम गौरव से ऊँचा किया है। जैसे आप बेटियों के हित में प्रगतिशील निर्णय ले रहे हैं। मुझे विश्वास है कि मेरी उपलब्धियों को भी आप नजरअंदाज़ नहीं करेंगे। रीना ने कहा एवरेस्ट पर चढ़ाई ने सिखाया कि सपने लिंग नहीं, बल्कि साहस देखते हैं। अगर इरादे मज़बूत हों तो कोई भी सपना यहाँ तक कि एवरेस्ट पर चढ़ाई भी सच हो सकता है। जूनून पर्वत से भी ऊँचा होता है और लड़कियाँ ये साबित कर चुकी हैं। हमारी ऊँचाइयों की कोई सीमा नहीं है – जो ठान लिया, वो हासिल किया। मंज़िलें हौसलों से तय होती हैं, जेन्डर से नहीं। मैंने आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और प्राकृतिक कई बाधाओं को पार करते हुए दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर तिरंगा फहराया है।

 

मेरे रिकॉर्ड को देखते हुए मैं सरकार से समर्थन की अपील करती हूँ ताकि राज्य की अन्य बेटियाँ भी यह संदेश पाएं कि अगर कोई लड़की आगे बढ़ने का संकल्प लेती है, तो सरकार उसके साथ खड़ी मिलती है। पूर्व मे कई पर्वतारोहियों को सरकार द्वारा नौकरी और प्रोत्साहन दिया गया है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है। मैं भी अपनी कठिनाइयों की मान्यता और समर्थन चाहती हूँ।

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