Ancient heritage: हरियाणा सरकार ने इस बावड़ी को प्राचीन धरोहर किया घोषित, जानिए क्या है इसका इतिहाल

Edited By Isha, Updated: 06 Jan, 2026 01:53 PM

haryana government has declared this stepwell an ancient heritage site

शहर के वार्ड 19 में स्थित लंबे समय से सरकार की उपेक्षा का शिकार बावड़ी पर प्रदेश सरकार संरक्षण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुकी है। जिसको लेकर सरकार द्वारा तीन दिसम्बर को गजट नोटिफिकेशन

टोहाना(सुशील): शहर के वार्ड 19 में स्थित लंबे समय से सरकार की उपेक्षा का शिकार बावड़ी पर प्रदेश सरकार संरक्षण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुकी है। जिसको लेकर सरकार द्वारा तीन दिसम्बर को गजट नोटिफिकेशन जारी कर डीडीए है जिसके अनुसार दो महीने में इसको लेकर सरकार के मुख्य सचिव को अपने सुझाव दे सके है।

 वार्ड 19 के रहने वाले व्यापार मंडल के संरक्षक रमेश गोयल ने कहा कि यह बावड़ी वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी थी। दीवारों और छतों पर झाड़ियों व पेड़ उग आए थे, बड़े दरवाजों और दीवारों के अवशेष ही इसकी पहचान बने हुए थे। स्थानीय लोग इसमें कचरा डालने लगे थे, जिससे यह स्थल उजाड़ और खतरनाक हो गया था।

कई बार जानवरों के इसमें गिरने की घटनाएं भी हो रही थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा बावड़ी को संरक्षण में लेने को लेकर गजट नोटिफिकेशन किया है वो सराहनीय है। उन्होंने बताया कि पुराने बुजुर्गों के अनुसार माना जाता है कि इसका निर्माण लोदी शासकों के काल में राजा अनंग पाल के समय हुआ था, जिन्होंने वर्ष 1451 से 1526 तक शासन किया। 

दिल्ली-मुल्तान व्यापार मार्ग पर स्थित यह बावड़ी उस समय यात्रियों और व्यापारियों के लिए जल स्त्रोत व विश्राम स्थल के रूप में कार्य करती थी। रमेश कुमार ने कहा कि हरियाणा व्यापार मंडल का प्रतिनिधिमंडल सरकार के मुख्य सचिव से मिलेगा और इस बावड़ी को ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल बनाने को लेकर अपने सुझाव भी देगा

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ये है इतिहास
वास्तुकला की दृष्टि से टोहाना की बावड़ी कैथल की बावड़ी से समानता रखती है। इसमें सुंदर डिजाइन, विशिष्ट नक्काशी और दूसरे मेहराब के मुख्य मेहराब में अनोखा वृत्ताकार स्वरूप देखने को मिलता है, जो उस काल की स्थापत्य शैली को दर्शाता है। अपनी वर्तमान जर्जर स्थिति के बावजूद यह बावड़ी क्षेत्र के समृद्ध इतिहास और स्थापत्य विरासत का प्रमाण मानी जाती है।

 गजट अधिसूचना के तहत बावड़ी को हरियाणा प्राचीन तथा ऐतिहासिक स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1964 के अंतर्गत संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। इसके साथ ही बावड़ी के आसपास का क्षेत्र भी संरक्षित क्षेत्र माना जाएगा, जहां बिना अनुमति किसी प्रकार का निर्माण या बदलाव प्रतिबंधित रहेगा। जबकि नोटिस में इसके प्रकाशन की तिथि से दो माह की अवधि से पूर्व उपरोक्त प्रस्ताव के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा आपेक्ष व विचार प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि विभाग के अधिकारी उसपर विचार कर सके।

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