हरियाणा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्व सांसद संजय भाटिया को राज्यसभा के लिए अगला उम्मीदवार
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्व सांसद संजय भाटिया को हरियाणा से राज्यसभा के लिए अगला उम्मीदवार घोषित किया गया है। यह घोषणा न केवल उनके राजनीतिक अनुभव का सम्मान है, बल्कि उनके लंबे सामाजिक और संगठनात्मक योगदान की भी स्वीकृति मानी जा रही है। हरियाणा भाजपा में संरचनात्मक दृष्टि से चाणक्य कहे जाने वाले संजय भाटिया अधिकतर समय पर्दे के पीछे रहकर संगठन का काम करते रहे हैं।
लोकसभा विधानसभा व प्रदेश में हुए अधिकतर उपचुनाव में कमान संभालने वाले संजय भाटिया का ट्रैक रिकॉर्ड सर्वश्रेष्ठ रहा है। करनाल लोकसभा सीट से भारी अंतराल की जीत का रिकॉर्ड बनाने वाले संजय भाटिया दूसरे प्रदेशों में पार्टी की संगठन आत्मक मजबूती का काम फिलहाल कर रहे हैं। हरियाणा भाजपा में युवा मोर्चा से लेकर पार्टी के विभिन्न दायित्वों का सफलतापूरक निर्वहन करते हुए वर्तमान में संजय भाटिया पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनाव का काम देख रहे हैं।
राज्यसभा के लिए उनका चयन इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व अनुभव, प्रतिबद्धता और संगठनात्मक निष्ठा को प्राथमिकता दे रहा है। राज्यसभा के लिए उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही संजय भाटिया के समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर है। संगठन, समाज और संसद में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए यह निर्णय हरियाणा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
कौन हैं संजय भाटिया
29 जुलाई 1967 को पानीपत में जन्मे संजय भाटिया ने भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा ए.बी.वी.पी. से छात्र राजनीति की शुरूआत की। संजय भाटिया ने साल 2019 में करनाल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कुलदीप शर्मा को 6,56,142 वोटों से हराकर हरियाणा के इतिहास की सबसे बड़ी जीत हासिल की। 2024 में उन्हें चुनावी मैदान में नहीं उतारा गया। उन्हें भाजपा ने हरियाणा के साथ साथ जम्मू कश्मीर के चुनाव में भी अहम जिम्मेदारी दी गई।
पूर्व सांसद संजय भाटिया का प्रेरणादायक राजनीतिक सफर
समर्पण, सेवा और सफलता की मिसाल संजय भाटिया हरियाणा की राजनीति में एक ऐसे प्रखर कार्यकर्ता और नेता के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र, समाज और जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया है। पानीपत में 29 जुलाई 1967 को जन्मे संजय भाटिया ने छात्र जीवन से ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़कर संगठनात्मक कार्य शुरू किया। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1980 के दशक में हुई, जब वे 1987 में मंडल महासचिव बने और 1989 में मंडल अध्यक्ष का पद संभाला। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं।
जिला महासचिव, जिला अध्यक्ष और 1998 में राज्य महासचिव तक का सफर तय किया। 2001 में उन्हें नगर परिषद का अध्यक्ष बनाया गया, जो उनकी लोकप्रियता और संगठन में सक्रियता का प्रमाण था। भाजपा में वे मंडल अध्यक्ष, जिला महासचिव, जिला अध्यक्ष, स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ के राज्य संयोजक और किसान मोर्चा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य जैसे पदों पर रहे।2015 से 2021 तक वे भाजपा हरियाणा के राज्य महासचिव रहे और हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के रूप में ग्रामीण विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में योगदान दिया।
उनका सबसे बड़ा राजनीतिक उपलब्धि 2019 लोकसभा चुनाव में आई, जब वे पहली बार चुनाव लड़ते हुए करनाल लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर भारी बहुमत से विजयी हुए। उन्होंने हरियाणा के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की, जो उनके कड़ी मेहनत, जनसंपर्क और पार्टी के प्रति समर्पण का परिणाम था। संसद में वे अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते थे। उच्च उपस्थिति, जनहित के मुद्दों पर बोलना और क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाना उनकी खासियत रही।
वे जनता के बीच काफी सुलभ और सक्रिय रहे, जिससे करनाल क्षेत्र में उनकी अच्छी छवि बनी। 2024 में उन्होंने पार्टी के फैसले का सम्मान करते हुए सीट छोड़ी और संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ निभाईं, जिसमें हरियाणा विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका शामिल थी। हाल ही में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है, जो उनके लंबे योगदान, संगठन में बढ़ते कद और पार्टी नेतृत्व के प्रति निष्ठा का सम्मान है।
संजय भाटिया जी का जीवन सिखाता है कि साधारण कार्यकर्ता से शुरू करके निरंतर मेहनत, निस्वार्थ सेवा और पार्टी के प्रति वफादारी से कोई भी ऊँचाइयाँ छू सकता है। उनका सफर लाखों युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत है—एक ऐसा नेता जो हमेशा "राष्ट्र पहले, समाज पहले" के सिद्धांत पर चला है। हरियाणा की जनभावनाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाले सक्रिय जनप्रतिनिधि रहे हैं। पूर्व में सांसद के रूप में उन्होंने संसद में प्रदेश के विकास, उद्योग, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठाया।
मनोहर लाल की वफादारी, संजय भाटिया को राज्यसभा भेजकर फिर साबित की दोस्ती की मिसाल
भाजपा के केंद्रीय मंत्री और पूर्व हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक बार फिर अपनी वफादारी की मिसाल पेश की है। पार्टी ने पूर्व सांसद संजय भाटिया का नाम हरियाणा से राज्यसभा सांसद के रूप पर घोषित किया तो यह स्पष्ट हो गया कि मनोहर लाल अपने अजीजों का साथ कभी नहीं छोड़ते। चाहे नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाने का मामला हो या अब भाटिया को ऊपरी सदन भेजने का, खट्टर ने साबित कर दिया कि वे विश्वासपात्रों के लिए हमेशा खड़े रहते हैं। हरियाणा की राजनीति में यह घटनाक्रम भाजपा की आंतरिक एकजुटता को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

भाजपा की राज्यसभा रणनीति में मनोहर लाल का अहम रोल
भाजपा ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए हरियाणा से संजय भाटिया का नाम प्रस्तावित किया, जो मनोहर लाल खट्टर की सिफारिश का नतीजा माना जा रहा है। भाटिया, जो करनाल से पूर्व सांसद रह चुके हैं, भाजपा के पुराने सिपाही हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में उन्होंने करनाल सीट जीती थी, लेकिन 2024 में नायब सैनी के पक्ष में मैदान से हट गए थे। खट्टर ने तब भी उनका साथ दिया। अब राज्यसभा नामांकन से साफ है कि मनोहर लाल अवसर मिलते ही अपने साथियों को ऊंचाई पर पहुंचाने से पीछे नहीं हटते। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम भाजपा की हरियाणा इकाई को मजबूत करेगा, खासकर जाट-गैर जाट समीकरण को संतुलित करने में।
हरियाणा में भाजपा की सत्ता यात्रा 2014 से शुरू हुई, जब मनोहर लाल खट्टर पहली बार मुख्यमंत्री बने। 75 वर्षीय खट्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं और उनकी सादगी व कठोर निर्णय लेने की क्षमता ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। 2019 में भी वे सत्ता में लौटे, लेकिन जजपा के साथ गठबंधन टूटा। फिर 2024 में नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाकर खट्टर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह बनाई। अब राज्यसभा नामांकन से उनकी रणनीतिक चतुराई फिर झलक रही है।
नायब सैनी को सीएम बनाने का पुराना वादा निभाया
मनोहर लाल की वफादारी की सबसे बड़ी मिसाल 2024 विधानसभा चुनाव के बाद नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय था। नायब सैनी को सीएम बनाकर जाट समुदाय को संदेश दिया। खट्टर ने कहा था, मेरे अजीज नायब को यह जिम्मेदारी मिलनी ही थी। यह कदम भाजपा की 'सभी के लिए सत्ता' नीति को दर्शाता है। विपक्षी कांग्रेस ने इसे 'खट्टर का कुनबा' करार दिया था, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसकी सराहना की थी। सैनी के नेतृत्व में हरियाणा में किसान आंदोलन के बाद शांति बनी और विकास पर फोकस बढ़ा।
खट्टर का यह फैसला अतीत की राजनीति से जुड़ा है।
2014 में वे अकेले भाजपा के दम पर सत्ता में आए, जब कांग्रेस और इनेलो कमजोर थे। जाट आरक्षण आंदोलन ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया, लेकिन खट्टर ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों से छवि सुधारी। अब सैनी को ऊंचा उठाकर उन्होंने गैर जाट नेतृत्व को मजबूत किया।
संजय भाटिया, करनाल से राज्यसभा तक की यात्रा
संजय भाटिया का राजनीतिक सफर भी खट्टर से जुड़ा है। 2019 में करनाल से सांसद बने भाटिया ने कोविड काल में राहत कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाई। 2024 में वे चुनावी समर से दूर रहे, लेकिन अब खट्टर ने उन्हें राज्यसभा का टिकट दिलवाया है। भाटिया व्यापारी पृष्ठभूमि से हैं और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में वकील रह चुके हैं। उनका नामांकन हरियाणा की तीन राज्यसभा सीटों (दो भाजपा, एक निर्दलीय) में से एक के लिए है। इससे भाजपा को ऊपरी सदन में मजबूती मिलेगी।विश्लेषक कहते हैं, भाटिया का चयन मनोहर लाल की रणनीति का हिस्सा है, जो 2029 तक हरियाणा में भाजपा का राज कायम रखने पर केंद्रित है। भाटिया ने कहा, 'मनोहर जी का आशीर्वाद है, जो मुझे यहां लाया गया।
हरियाणा राजनीति में वफादारी की विरासत और भविष्य की चुनौतियां
हरियाणा की राजनीति हमेशा वफादारी और विश्वास पर टिकी रही। भूपेंद्र सिंह हुड्डा से लेकर ओम प्रकाश चौटाला तक, नेताओं ने अपने चहेतों को आगे बढ़ाया। मनोहर लाल ने भाजपा में इस परंपरा को नई ऊंचाई दी। 2014-24 के उनके शासन में हरियाणा ने 12 गुना निवेश आकर्षित किया, मेट्रो व एक्सप्रेसवे बने। लेकिन जाट आरक्षण, किसान मुद्दे चुनौतियां बने। अब सैनी सरकार में खट्टर केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हैं और हरियाणा को स्मार्ट सिटी फंड दिला रहे हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा 'परिवारवाद' कर रही, लेकिन खट्टर का जवाब है 'विश्वास ही हमारी ताकत है।' राज्यसभा चुनाव में भाजपा का बहुमत साफ है। भाटिया का नामांकन हरियाणा भाजपा को एकजुट रखेगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि खट्टर 2029 चुनाव में फिर सक्रिय होंगे। यह घटनाक्रम साबित करता है कि हरियाणा में भाजपा की सत्ता मनोहर लाल जैसे नेताओं की वफादारी पर टिकी है।

सामाजिक सरोकारों से गहरा जुड़ाव
राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ संजय भाटिया सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने अनेक सामाजिक अभियानों और जनहित कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे वे जनता के बीच लोकप्रिय और सहज उपलब्ध नेता के रूप में स्थापित हुए।
विकासोन्मुख सोच और प्रशासनिक अनुभव
संजय भाटिया को प्रशासनिक दृष्टि से भी एक अनुभवी और दूरदर्शी नेता माना जाता है। औद्योगिक विकास, निवेश को बढ़ावा देने और प्रदेश की आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण के लिए उनके प्रयासों की व्यापक सराहना हुई है।
हरियाणा की आवाज़ को मिलेगा नया मंच
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा में संजय भाटिया की उपस्थिति हरियाणा के मुद्दों को प्रभावी ढंग से राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में सहायक सिद्ध होगी। उनका अनुभव और जनसंपर्क कौशल उन्हें उच्च सदन में एक सशक्त प्रतिनिधि के रूप में स्थापित कर सकता है।
राजनीतिक सफर
हरियाणा की राजनीति में अपनी सादगी, संगठनात्मक क्षमता और विकासोन्मुख दृष्टि के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व सांसद संजय भाटिया का राजनीतिक जीवन एक समर्पित कार्यकर्ता से राष्ट्रीय स्तर के जनप्रतिनिधि बनने तक की प्रेरक यात्रा है। पानीपत की धरती से उठकर उन्होंने प्रदेश और केंद्र की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पहचान
संजय भाटिया ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत संगठनात्मक गतिविधियों से की। युवावस्था से ही वे सामाजिक और राजनीतिक अभियानों में सक्रिय रहे। स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यक्रमों के संचालन, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और जनसंपर्क अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें एक कर्मठ और भरोसेमंद चेहरा बनाया।
संरचना सुदृढ़ करने में अहम भूमिका
पार्टी संगठन में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने जिला और प्रदेश स्तर पर संगठन को मजबूती प्रदान की। उनकी कार्यशैली संवाद और समन्वय पर आधारित रही, जिसके कारण वे कार्यकर्ताओं और नेतृत्व—दोनों के बीच सेतु के रूप में स्थापित हुए। हरियाणा में संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और बूथ स्तर तक सशक्त नेटवर्क खड़ा करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
लोकसभा में प्रभावशाली प्रतिनिधित्व
संजय भाटिया ने सांसद के रूप में हरियाणा, विशेषकर करनाल लोकसभा क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रमुखता से उठाया। औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल सुविधाओं और युवाओं के रोजगार जैसे विषय उनके एजेंडे में प्राथमिकता पर रहे। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को राष्ट्रीय मंच तक ले जाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
राजनीति से परे जनसेवा
राजनीति के साथ-साथ वे सामाजिक गतिविधियों में भी निरंतर सक्रिय रहे। शिक्षा संस्थानों के प्रोत्साहन, स्वास्थ्य शिविरों, पर्यावरण संरक्षण अभियानों और सामाजिक समरसता कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी ने उन्हें जनता के बीच सहज और सुलभ नेता के रूप में स्थापित किया। आपदा या संकट की घड़ी में भी उनकी सक्रिय उपस्थिति ने जनविश्वास को मजबूत किया।
विकास दृष्टि और प्रशासनिक अनुभव
औद्योगिक नगरी पानीपत के विकास को नई दिशा देने के प्रयासों में उनकी सोच दीर्घकालिक और व्यावहारिक रही। निवेश को आकर्षित करने, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और युवाओं के लिए अवसर सृजित करने के मुद्दों पर उन्होंने लगातार काम किया। उनकी प्रशासनिक समझ और संवाद कौशल को राजनीतिक विश्लेषक उनकी प्रमुख ताकत मानते हैं।
अनुभव, प्रतिबद्धता और जनविश्वास की पूंजी
पानीपत निवासी पूर्व सांसद संजय भाटिया का राजनीतिक जीवन समर्पण, संगठनात्मक निष्ठा और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। जमीनी कार्यकर्ता से लेकर संसद तक की उनकी यात्रा हरियाणा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखी जाती है। उनका अनुभव और जनसंपर्क कौशल आने वाले समय में भी प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।
(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)