Edited By Isha, Updated: 09 Sep, 2026 02:34 PM

ईंट भट्ठे के पास करीब दो साल के बच्चे को ट्रक से कुचलने से मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषी चालक को राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस मंदीप पन्नू ने भगीरथ उर्फ भागी की आपराधिक
चंडीगढ़ : ईंट भट्ठे के पास करीब दो साल के बच्चे को ट्रक से कुचलने से मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषी चालक को राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस मंदीप पन्नू ने भगीरथ उर्फ भागी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए छह महीने के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी।
मामला 14 मार्च 2001 का है। भिवानी के पास ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने वाले दंपती का दो साल का बेटा ओमबीर पास में खेल रहा था। इसी दौरान ईंट लेने पहुंचे ट्रक चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए बच्चे को कुचल दिया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। मृतक की मां नीलम अभियोजन की मुख्य चश्मदीद गवाह थी।
हुए बचाव पक्ष ने उसकी गवाही पर सवाल उठाते कहा कि बच्चे के पिता को गवाह नहीं बनाया गया। साथ ही संकरे रास्ते के कारण ट्रक तेज गति से नहीं चलने का तर्क दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि लापरवाही केवल वाहन की गति से तय नहीं होती। घटनास्थल और वाहन चलाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने मां की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए दोषसिद्धि बरकरार रखी।
भगीरथ ने करीब 25 साल तक मुकदमा चलने और केवल 18 दिन जेल में रहने का हवाला देकर सजा को इसी अवधि तक सीमित करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि मुकदमे में लंबा समय बीतना सजा कम करने का स्वतः आधार नहीं है। छह महीने का कठोर कारावास अपराध की गंभीरता के अनुपात में अधिक नहीं है।
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