हाई कोर्ट से 25 साल बाद बिजली निगम को बड़ी राहत, जानें क्या था मामला

Edited By Isha, Updated: 20 Feb, 2026 12:20 PM

after 25 years the high court gave a big relief to the electricity corporation

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लगभग 25 वर्ष पुराने विवाद  पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हरियाणा की बिजली प्रसारण कंपनी को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने केंद्र 58 सरकार को निर्देश दिया है कि विलंब ही से लौटाई गई

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लगभग 25 वर्ष पुराने विवाद  पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हरियाणा की बिजली प्रसारण कंपनी को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने केंद्र 58 सरकार को निर्देश दिया है कि विलंब ही से लौटाई गई उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) की राशि पर निर्धारित दर से ब्याज का भुगतान किया जाए। यह मामला हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (एचवीपीएनएल) से जुड़ा है, जिसने 1980 के दशक के अंतिम वर्षों में स्टील स्ट्रक्चर टावरों के निर्माण (फैब्रिकेशन) पर जारी कारण बताओ नोटिस के बाद पूर्व विरोध दर्ज कराते हुए लगभग 30 लाख रुपये की एक्साइज ड्यूटी जमा यह कराई थी।

कंपनी का कहना था कि यह राशि दबाव में और आपत्ति के साथ जमा कराई गई थी। हाई कोर्ट ने निगम की याचिका स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि कंपनी को केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम 1944 की धारा 11 बीबी के तहत ब्याज पाने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि जब अपीलीय प्राधिकारी ने 1987 और 1990 में कंपनी के पक्ष में निर्णय दे दिया था, तब विभाग को समय पर रिफंड जारी करना चाहिए था।

रिकार्ड के अनुसार, बिजली निगम ने मामले को आगे अपीलीय न्यायाधिकरण तक ले जाकर संदर्भआवेदन दायर किए, जो अंततः खारिज हो गए। इसके बावजूद 1989 और 1990 के दौरान कंपनी द्वारा कई पत्र लिखे जाने के बाद भी रिफंड राशि 29 दिसंबर 2000 को स्वीकृत की गई। ब्याज का प्रश्न अनिर्णीत ही रहा, जिसके कारण मुकदमा वर्षों तक चलता रहा। अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि चूंकि राशि विरोध स्वरूप जमा की गई थी और अपीलीय आदेश कंपनी के पक्ष में थे, इसलिए विभाग की ओर से की गई देरी का खामियाजा याचिकाकर्ता पर नहीं डाला जा सकता।

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