Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 15 Jan, 2026 08:22 PM

नूंह जिले के महू चोपड़ा गांव में बुधवार देर शाम दोबारा दो पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और देखते ही देखते हालात पथराव में बदल गए। जा
नूंह, (ब्यूरो): नूंह जिले के महू चोपड़ा गांव में बुधवार देर शाम दोबारा दो पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और देखते ही देखते हालात पथराव में बदल गए। जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत बच्चों के बीच किसी मामूली कहासुनी से हुई थी, लेकिन बात जल्द ही बड़ों तक पहुंच गई और दोनों ओर से लोग इकट्ठा होने लगे। थोड़े ही समय में यह विवाद हिंसक झड़प का रूप ले चुका था, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से पथराव किया गया। इस घटना में कुछ लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई है, हालांकि घायलों की आधिकारिक संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
गौरतलब है कि महू चोपड़ा गांव में कुछ दिन पहले भी इसी तरह का विवाद हुआ था। करीब पांच दिन पहले क्रिकेट खेलते समय गेंद खेत में चली जाने को लेकर विवाद बढ़ गया था और उस दौरान भी दोनों पक्षों में जमकर पथराव हुआ था। उस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के कुल 66 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बावजूद गांव में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका और बुधवार को फिर से हालात बिगड़ गए। घटना की सूचना मिलते ही फिरोजपुर झिरका सदर थाना प्रभारी और डीएसपी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस अधिकारियों ने गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और दोनों पक्षों को समझाते हुए शांत कराने का प्रयास किया। गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। देर रात तक पुलिस टीम गांव में मौजूद रही और हालात पर कड़ी निगरानी बनाए रखी। एसएचओ से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस को कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था भंग करने की कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों से भी शांति बनाए रखने की अपील की गई है। लगातार दो घटनाओं के बाद गांव के लोगों में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे-छोटे विवादों का बार-बार बड़े टकराव में बदल जाना चिंताजनक है। पुलिस अब पूरे प्रकरण पर नजर रखे हुए है और कोशिश की जा रही है कि आपसी बातचीत और समझाइश से वातावरण सामान्य बनाया जा सके, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति दोबारा पैदा न हो।