नींद कम हो जाए, लेकिन जनता उनसे बिना मिले न लौटे: नायब सिंह सैनी

Edited By Isha, Updated: 23 Aug, 2026 08:44 AM

they may lose sleep but the public should not return without meeting him

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी एक भावपूर्ण पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री पद के प्रति अपने दृष्टिकोण और जनता के साथ अपने जुड़ाव को सामने रखा है।

चंडीगढ़( चंन्द्र शेखर धरणी ): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी एक भावपूर्ण पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री पद के प्रति अपने दृष्टिकोण और जनता के साथ अपने जुड़ाव को सामने रखा है। मुख्यमंत्री ने एक युवा साथी के सवाल का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उनसे पूछा गया कि वे आराम कब करते हैं, तो इस सवाल के माध्यम से उन्होंने प्रदेश के परिवारजनों के साथ अपने संबंधों की तस्वीर सामने रखी। सैनी के मुताबिक, दिनभर के व्यस्त कार्यक्रमों के बाद जब वे मुख्यमंत्री आवास ‘संत कबीर कुटीर’ लौटते हैं और प्रदेशवासियों से मिलने का अवसर मिलता है, तो उनकी बातें सुनना, सुझाव समझना और समस्याओं के समाधान का प्रयास करना ही उनके लिए सबसे बड़ा सुकून बन जाता है।

व्यस्त दिनचर्या के बीच जनता से मुलाकात को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पोस्ट का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि वे अपनी व्यस्त प्रशासनिक दिनचर्या को जनता से दूरी का कारण नहीं बनने देना चाहते। मुख्यमंत्री के तौर पर उनके सामने लगातार सरकारी बैठकों, कार्यक्रमों, विकास योजनाओं की समीक्षा और प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारियां रहती हैं। इसके बावजूद वे जनता से प्रत्यक्ष संवाद को अपनी कार्यशैली का अहम हिस्सा मानते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दिनभर की थकान के बाद भी जब प्रदेश के लोग उनसे मिलते हैं और अपनी बात रखते हैं, तो उनकी समस्याओं को सुनना उन्हें बोझ नहीं बल्कि संतोष देता है। यह संदेश मुख्यमंत्री की उस राजनीतिक कार्यशैली को रेखांकित करता है, जिसमें आम नागरिक के साथ सीधा संपर्क महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘आपकी मुस्कान ही मेरा सबसे बड़ा सुकून’
मुख्यमंत्री सैनी ने अपनी पोस्ट में प्रदेशवासियों की मुस्कान, विश्वास और संतुष्टि को अपने लिए सबसे बड़ा सुकून बताया। यह भाव मुख्यमंत्री और आम नागरिक के बीच भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। उनका कहना है कि किसी परिवारजन की समस्या सुनने और उसके समाधान की दिशा में प्रयास करने के बाद मिलने वाली संतुष्टि दिनभर की थकान को दूर कर देती है।

राजनीतिक दृष्टि से भी मुख्यमंत्री का यह संदेश महत्वपूर्ण है। सत्ता में रहते हुए जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता और विश्वास को मजबूत करना किसी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होती है। सैनी ने अपनी पोस्ट के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया है कि उनके लिए शासन केवल सरकारी फाइलों और बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान की कोशिश करना भी शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नींद कम हो जाए, लेकिन जनता बिना मिले न लौटे
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में एक भावपूर्ण संकल्प भी व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि नींद भले ही थोड़ी कम हो जाए, लेकिन उनके प्रदेश का कोई परिवारजन अपनी बात कहे बिना या अपनी समस्या लेकर उनसे मिले बिना वापस न जाए—यही उनका प्रयास रहता है।

यह कथन उनके जनसंपर्क की प्राथमिकता को सामने रखता है। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए आम लोगों के लिए उपलब्ध रहना प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास पैदा करने का माध्यम भी बनता है। जब नागरिक सीधे अपनी समस्या मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकता है, तो उसे यह भरोसा मिलता है कि शासन उसकी बात सुनने के लिए तैयार है।

संत कबीर कुटीर बना संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र
मुख्यमंत्री आवास ‘संत कबीर कुटीर’ का उल्लेख भी इस पोस्ट में खास महत्व रखता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, दिनभर के कार्यक्रमों के बाद यहीं लौटकर वे प्रदेशवासियों से मिलने और उनकी बातें सुनने का अवसर प्राप्त करते हैं। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री आवास केवल प्रशासनिक या औपचारिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि जनता से संवाद का स्थान भी बनकर उभरता है।

सैनी के इस संदेश में यह धारणा दिखाई देती है कि मुख्यमंत्री और आम नागरिक के बीच संवाद की दूरी कम होनी चाहिए। जनता की समस्याओं को समझने के लिए सीधे उनसे बातचीत करना प्रशासनिक निर्णयों को अधिक संवेदनशील बनाने में मदद कर सकता है।

मुख्यमंत्री पद नहीं, ‘मुख्य सेवक’ की भूमिका पर जोर
पोस्ट की सबसे प्रभावशाली पंक्ति मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह कहना है कि ‘मैं मुख्यमंत्री नहीं, आपका मुख्य सेवक हूं।’ इस एक वाक्य में उन्होंने अपने राजनीतिक दर्शन और शासन की प्राथमिकता को स्पष्ट करने का प्रयास किया है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह होता है। सैनी ने इसी भावना को ‘मुख्य सेवक’ की संज्ञा देकर सामने रखा है। उनका कहना है कि प्रदेशवासियों से मिलना उनके लिए केवल संवैधानिक अथवा प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आत्मिक सुकून भी है।

 

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