Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 31 Jan, 2026 04:17 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य को 2047 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन जिस तरह से इन छात्रों की सोच है और उन्होंने अपनी सोच को मॉडल के जरिए प्रस्तुत किया है उससे हम विकसित भारत के लक्ष्य को साल 2037 तक पूरा कर...
गुड़गांव, (ब्यूरो): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य को 2047 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन जिस तरह से इन छात्रों की सोच है और उन्होंने अपनी सोच को मॉडल के जरिए प्रस्तुत किया है उससे हम विकसित भारत के लक्ष्य को साल 2037 तक पूरा कर लेंगे। छात्रों ने बड़ी-बड़ी समस्याओं का बेहद ही आसानी से समाधान अपने मॉडल के जरिए प्रस्तुत किया है। चाहे पर्यावरण संरक्षण की बात हो या जैविक खेती की बात हो। प्लास्टिक का विकल्प खोजना हो या एआई तकनीक का उपयोग कर हर मुश्किल काम को आसान बनाना हो। इन सभी कार्यों के लिए छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
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यही बाल वैज्ञानिक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। यह बात प्रदेश के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कही। वे आज गुड़गांव में राज्य शैक्षणिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी में आयोजित राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। इस अवसर पर उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह भी बतौर विशिष्ठ अतिथि मौजूद रहे। महिपाल ढांडा ने कहा कि छात्रों के लिए जल्द ही स्कूलों में करियर काउंसलिंग भी शुरू होगी। अब तक यूनिवर्सिटी स्तर पर ही यह कार्य किया जाता था, लेकिन अब स्कूल स्तर पर भी एमओयू किए जाएंगे।
वहीं, कार्यक्रम में पहुंचे उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने भी छात्रों की प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने साथ ही शिक्षामंत्री से कहा कि प्रदेश में सबसे ज्यादा शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। आज लोग प्राइवेट स्कूल में छात्रों को पढ़ाना अपना स्टेटस सिंबल मानते हैं। गुड़गांव में अगर किसी को पता लग जाए कि उनका बच्चा सरकारी स्कूल में बैठता है। ऐसे में लोग उस व्यक्ति को अपने पास भी नहीं बैठने देते। यहां तक कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का रिश्ता भी नहीं होता। उन्होंने शिक्षा मंत्री से कहा कि स्कूलों का स्तर सुधारने के लिए वह उद्योगों से मदद कराएंगे। सीएसआर के तहत स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं दिलाएंगे।
राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में 22 जिलों के 154 मॉडल प्रस्तुत किए गए। इन मॉडल में विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिलेगा। अतिथियों ने प्रदर्शनी में आए छात्रों की प्रतिभा की प्रशंसा की और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।