गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग के अधिकारों की रक्षा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : राव नरबीर सिंह

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 15 Jan, 2026 08:06 PM

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गांव शिकोहपुर की अनुसूचित जाति कॉलोनी का कृषि विज्ञान केंद्र के साथ दशकों से लंबित भूमि विवाद के समाधान की दिशा में हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के निरंतर, प्रभावी और संवेदनशील प्रयास निर्णायक सिद्ध हुए।

गुड़गांव, (ब्यूरो): गांव शिकोहपुर की अनुसूचित जाति कॉलोनी का कृषि विज्ञान केंद्र के साथ दशकों से लंबित भूमि विवाद के समाधान की दिशा में हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के निरंतर, प्रभावी और संवेदनशील प्रयास निर्णायक सिद्ध हुए। वीरवार को गांव शिकोहपुर के ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह की अगवाई में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर पूरे मामले का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया। 

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केंद्रीय मंत्री की ग्रामीणों के साथ ही इस सार्थक बैठक में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का भी विशेष सहयोग रहा। बैठक के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी भी मौजूद रहे और प्रकरण से संबंधित प्रशासनिक व तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई। बता दें कि कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने जनभावनाओं को प्राथमिकता देते हुए इस मामले को गंभीरता से उठाया और ग्रामीणों की समस्या को संबंधित मंचों तक मजबूती से पहुंचाया, जिसके परिणामस्वरूप आज ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केवीके अधिकारियों से ग्रामीणों को राहत देने के दिए निर्देश

मामले की विस्तृत जानकारी लेने और सभी तथ्यों पर विचार-विमर्श के उपरांत केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित भूमि को लेकर आवश्यक कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को राहत प्रदान की जाए। केंद्रीय मंत्री के इस निर्णय से गांव शिकोहपुर के सैकड़ों अनुसूचित परिवारों को राहत मिली है और वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता का समाधान संभव हो सका है।

 

गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग के अधिकारों की रक्षा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : राव नरबीर सिंह

राव नरबीर सिंह ने कहा कि केंद्र व हरियाणा सरकार जनमानस के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए धरातल पर कार्य कर रही है। सरकार की नीति स्पष्ट है कि गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग के अधिकारों की प्राथमिकता के साथ रक्षा की जाएग। शिकोहपुर का यह मामला सरकार की इसी संवेदनशील और जनोन्मुखी सोच का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से जनता तक पहुंचे। जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय से समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जा रहा है और भविष्य में भी हरियाणा सरकार जनहित से जुड़े हर मुद्दे पर तत्परता से कार्रवाई करती रहेगी।

 

ग्रामीणों ने उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह का जताया आभार

ग्रामीणों ने राव नरबीर सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यदि उन्होंने इस मामले को लगातार आगे न बढ़ाया होता तो दशकों से चला आ रहा यह विवाद समाप्त नहीं हो पाता। ग्रामीणों ने निर्णय का स्वागत करते हुए केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताया। केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करने गए प्रतिनिमंडल में शामिल पूर्व सरपंच लखन सिंह ने कहा कि “कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने हमारी बात को मजबूती से उठाया और समाधान तक पहुंचाया। उनके प्रयासों से हमें वर्षों बाद राहत मिली है। रणबीर और बीरेंद्र ने कहा कि कैबिनेट मंत्री की संवेदनशीलता और ईमानदार प्रयासों के कारण आज हमारे परिवारों का भविष्य सुरक्षित हुआ है। अजीत तथा धर्मवीर ने कहा कि यह फैसला हमारे लिए बहुत बड़ा सुकून लेकर आया है। कैबिनेट मंत्री ने आम आदमी की परेशानियों को समझ मजबूती से हमारा पक्ष रखा जिससे यह निर्णय संभव हो पाया है। 

 

यह था पूरा मामला

गांव शिकोहपुर की अनुसूचित जाति कॉलोनी लगभग 7 एकड़ भूमि पर बीते करीब 40 वर्षों से आबाद है। यहां ग्रामीणों के पक्के मकान बने हुए हैं तथा बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं लंबे समय से उपलब्ध हैं। संबंधित परिवारों के पहचान पत्र और वोटर कार्ड भी इसी पते पर बने हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह बस्ती सामाजिक रूप से वर्षों से स्थापित है। तथ्यों के अनुसार यह भूमि पूर्व में ग्राम पंचायत के नाम दर्ज थी, जिसे बाद में कृषि विज्ञान केंद्र के उद्देश्य से स्थानांतरित किया गया। हालांकि कृषि विज्ञान केंद्र के लिए कुल 65 एकड़ भूमि में से 52 एकड़ भूमि पर्याप्त पाई गई और 7 एकड़ भूमि पर स्थित अनुसूचित जाति कॉलोनी को हटाने की आवश्यकता नहीं थी। प्रशासनिक रिपोर्टों और राजस्व अभिलेखों के अवलोकन में यह तथ्य भी सामने आया कि बस्ती के बने रहने से कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इन्हीं तथ्यों के आधार पर मामले के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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