Edited By Isha, Updated: 02 Nov, 2026 06:56 PM

हरियाणा सरकार ने प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के अधिकारों और उनके साथ होने वाले व्यवहार पर निगरानी रखने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत प्रदेश की सभी 20 जेलों के लिए जिला स्तर पर विजिटर बोर्ड गठित किए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से...
चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा सरकार ने प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के अधिकारों और उनके साथ होने वाले व्यवहार पर निगरानी रखने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत प्रदेश की सभी 20 जेलों के लिए जिला स्तर पर विजिटर बोर्ड गठित किए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से जेलों की आंतरिक व्यवस्थाओं, कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके अधिकारों के संरक्षण की नियमित समीक्षा की जाएगी।
इन बोर्डों की कमान संबंधित जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंपी गई है। खास बात यह है कि जेलों की निगरानी की इस व्यवस्था में केवल सरकारी अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, मानवाधिकार आयोग के प्रतिनिधियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी भागीदारी दी गई है। महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बोर्ड में एक महिला विधायक और एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।
जेल विभाग ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों तथा मॉडल प्रिजन मैनुअल-2016 में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप उठाया है। इसका उद्देश्य जेलों के कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाना और कैदियों को निर्धारित कानूनी अधिकारों एवं बुनियादी सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित करना है।
प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग तक की भागीदारी
विजिटर बोर्ड में जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक अथवा पुलिस उपायुक्त, मुख्य चिकित्सा अधिकारी या सिविल सर्जन को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा जिला रोजगार अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला उद्योग अधिकारी, जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के कार्यकारी अभियंता, जिला शिक्षा अधिकारी तथा जिला कृषि या बागवानी अधिकारी भी बोर्ड का हिस्सा होंगे।
इस व्यापक प्रतिनिधित्व के पीछे उद्देश्य जेलों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विभागीय स्तर पर समीक्षा करना है, ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक कल्याण और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित समस्याओं पर भी ध्यान दिया जा सके।
तीन विधायकों और मानवाधिकार आयोग के प्रतिनिधि को भी जगह
बोर्ड में हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नामित तीन विधायकों को भी सदस्य बनाया जाएगा। इनमें कम से कम एक महिला विधायक का होना जरूरी है। इसके साथ ही हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष द्वारा नामित प्रतिनिधि भी बोर्ड में शामिल रहेगा।
सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए प्रत्येक जिले से दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में नामित किया गया है। इनमें एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता का शामिल होना अनिवार्य है। इस प्रकार प्रदेशभर में कुल 40 गैर-सरकारी विजिटर नामित किए गए हैं।
हर तिमाही जेलों का दौरा करना होगा अनिवार्य
विजिटर बोर्ड के सदस्यों को संबंधित जेल का प्रत्येक तीन महीने में कम से कम एक बार निरीक्षण करना होगा। इस दौरान जेल की व्यवस्थाओं और कैदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया जाएगा। निरीक्षण के लिए बोर्ड का कोरम अध्यक्ष सहित कम से कम तीन सदस्यों की मौजूदगी से पूरा होगा।
सरकार ने गैर-सरकारी सदस्यों की भूमिका को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में निर्धारित किया है। उन्हें जेल निरीक्षण के लिए किसी प्रकार का यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, मानदेय या अन्य पारिश्रमिक नहीं दिया जाएगा। इन सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित किया गया है।
इस व्यवस्था से जेलों की निगरानी में न्यायिक, प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व एक साथ आएगा। नियमित निरीक्षण के जरिए जेलों में पारदर्शिता बढ़ाने, कैदियों की समस्याओं को सामने लाने और उनके अधिकारों के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की उम्मीद है।