Haryana : चार पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट से तय होगी कांग्रेस जिलाध्यक्षों की सियासी पारी, इस सप्ताह से संगठन की थर्डपार्टी समीक्षा

Edited By Harman, Updated: 17 Aug, 2026 10:54 AM

political innings of congress district presidents will be decided by the report

हरियाणा में वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में प्रदेश के जिलाध्यक्षों के कामकाज की थर्डपार्टी समीक्षा के लिए नियुक्त किए गए चार केंद्रीय...

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा में वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में प्रदेश के जिलाध्यक्षों के कामकाज की थर्डपार्टी समीक्षा के लिए नियुक्त किए गए चार केंद्रीय पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारियां तय करने की सीमा रविवार तक तय थी। प्रदेश के जिलों को चार जोन में बांटकर प्रत्येक पर्यवेक्षक को एक जोन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके बाद अगले सप्ताह से पर्यवेक्षक अपने-अपने जोन में संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन शुरू कर सकते हैं।

इन पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट कांग्रेस के मौजूदा जिलाध्यक्षों के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी के भीतर करीब पांच से छह जिलाध्यक्षों के कामकाज को लेकर असंतोष की चर्चा है। ऐसे में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होने की संभावना है कि किन जिलों में मौजूदा नेतृत्व को बरकरार रखा जाए और कहां बदलाव किया जाए।

रविवार तक चार जोन में बंटेगा प्रदेश

कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने हरियाणा के लिए चार वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। रविवार तक प्रदेश के संगठनात्मक जिलों को चार जोन में बांटने की प्रक्रिया पूरी किए जाने की उम्मीद है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी एक पर्यवेक्षक को दी जाएगी। अगले सप्ताह से ये नेता संबंधित जिलों का दौरा कर स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों से फीडबैक ले सकते हैं।

पर्यवेक्षकों का मुख्य उद्देश्य केवल जिलाध्यक्षों के कामकाज का आकलन करना नहीं होगा, बल्कि संगठन की जमीनी सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, पार्टी कार्यक्रमों की स्थिति और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की पकड़ का भी मूल्यांकन करना होगा। इससे कांग्रेस को जिलावार संगठन की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

पांच-छह जिलाध्यक्षों पर नजर

पार्टी सूत्रों के अनुसार करीब एक वर्ष पहले नियुक्त किए गए जिलाध्यक्षों में से पांच से छह का रिपोर्ट कार्ड संतोषजनक नहीं माना जा रहा है। ऐसे जिलों में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह लगातार इस बात से इनकार कर रहे हैं कि संगठन की कमजोरी का समाधान केवल जिलाध्यक्ष बदलना है। उनका जोर संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने पर है। पार्टी नेतृत्व भी चाहता है कि किसी पदाधिकारी को केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर हटाने के बजाय उसके कामकाज का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए। यही कारण है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों को जिम्मेदारी देकर थर्डपार्टी समीक्षा की व्यवस्था की गई है।

हांसी में नया जिला अध्यक्ष, पंचकूला और फरीदाबाद में दो-दो

संगठन सृजन अभियान के तहत कुछ जिलों की संगठनात्मक संरचना में भी बदलाव किया जाना है। हांसी में नया जिला अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा पंचकूला और फरीदाबाद में दो-दो जिलाध्यक्ष बनाए जाने की योजना है। इसके पीछे पार्टी की कोशिश संगठन को प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर अधिक प्रभावी बनाना है।पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बड़े राजनीतिक और भौगोलिक क्षेत्र वाले जिलों में एक ही जिलाध्यक्ष पर संगठन की पूरी जिम्मेदारी होने से कई बार कार्यकर्ताओं तक प्रभावी पहुंच नहीं बन पाती। ऐसे में कुछ जिलों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को अलग-अलग स्तर पर बांटने की तैयारी है।

गुटबाजी खत्म करना सबसे बड़ी चुनौती

हरियाणा कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने के साथ-साथ अंदरूनी गुटबाजी की चुनौती भी बनी हुई है। प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच अलग-अलग राजनीतिक खेमों की चर्चा लंबे समय से होती रही है। संगठन को मजबूत करने की कोशिशों के बावजूद यह खींचतान पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। प्रदेश प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त लगातार विभिन्न नेताओं के साथ संवाद कर इस दूरी को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। वह प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी अवगत करा रहे हैं। इसी फीडबैक के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को संगठनात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

चार वरिष्ठ नेताओं के हाथ में अहम जिम्मेदारी

हरियाणा के लिए नियुक्त चार केंद्रीय पर्यवेक्षकों में आंध्र प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डा. एन. रघुवीरा रेड्डी, महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री यशोमति ठाकुर, मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू शामिल हैं। इन नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी मिलने के बाद वे संगठन की स्थिति का स्वतंत्र आकलन करेंगे। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत के साथ जिलाध्यक्षों की सक्रियता, पार्टी कार्यक्रमों में भागीदारी और संगठन विस्तार की क्षमता को भी परखा जा सकता है।

रिपोर्ट बनेगी जिलाध्यक्षों के भविष्य का आधार

कांग्रेस के लिए यह पूरी कवायद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2029 के विधानसभा चुनाव में सत्ता वापसी का लक्ष्य पार्टी ने सामने रखा है। इसके लिए केवल प्रदेश स्तर पर सक्रियता पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि बूथ से लेकर जिला स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करना जरूरी होगा।

ऐसे में चारों पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट महज संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। यह रिपोर्ट कई जिलाध्यक्षों के राजनीतिक भविष्य का आधार भी बन सकती है। जिन जिलों में संगठन मजबूत और सक्रिय मिला, वहां मौजूदा नेतृत्व को आगे काम करने का मौका मिल सकता है, जबकि लगातार निष्क्रियता, गुटबाजी या कार्यकर्ताओं से कमजोर तालमेल वाले जिलाध्यक्षों के स्थान पर नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

रविवार तक जोन तय होने और अगले सप्ताह पर्यवेक्षकों के मैदान में उतरने के साथ ही हरियाणा कांग्रेस के संगठन में बदलाव और मजबूती की प्रक्रिया का अगला चरण शुरू हो जाएगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट में किन जिलों के संगठन को बेहतर माना जाता है और किन जिलाध्यक्षों के कामकाज पर सवाल उठते हैं।

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