अरावली में अवैध खनन पर HC चिंतित, दादरी के गांव में पर्यावरण मानदंडों का घोर उल्लंघन, CS से मांगा हलफनामा

Edited By Manisha rana, Updated: 03 Feb, 2026 03:53 PM

gross violation of environmental norms in dadri village

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अरावली क्षेत्र को पर्यावरणीय लूट का स्थल बताया और अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि टीले गायब हो गए हैं जबकि विशाल गड्ढे अभी भी मौजूद हैं।

चंडीगढ़ : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अरावली क्षेत्र को पर्यावरणीय लूट का स्थल बताया और अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि टीले गायब हो गए हैं जबकि विशाल गड्ढे अभी भी मौजूद हैं। हाईकोर्ट ने हरियाणा के चरखी दादरी जिले के एक गांव में पत्थर खनन स्थल पर पर्यावरण मानदंडों का घोर उल्लंघन और प्राकृतिक संसाधनों की लूट और डकैती पर गंभीर चिंता व्यक्त की। एक अंतरिम आदेश में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने पिचोपा कलां की स्थिति को पारिस्थितिकी और पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ व्यापक जनहित के लिए बहुत व्यापक प्रभाव डालने वाली बताया।

यह मामला पिचोपा कलां के निवासियों द्वारा दायर एक रिट याचिका से शुरू हुआ, जिसमें धर्मपाल स्टोन क्रेशर के संचालक भी शामिल थे, जिन्होंने भूमि के सतही अधिकार धारक होने का दावा किया था। उन्होंने निजी पट्टेदार जय दादा दोहला स्टोन माइंस पर खसरा संख्या 109 और 110 में स्वीकृत 11 हेक्टेयर क्षेत्र से कहीं अधिक अंधाधुंध अवैध खनन करने का आरोप लगाया, जिससे बड़े पैमाने पर पारिस्थितिक विनाश हुआ। उन्होंने याचिका के साथ तस्वीरें संलग्न कीं, जिनमें दिखाया गया था कि विचाराधीन भूमि पर मौजूद पहाड़ियां गायब हो गई हैं। खनन अधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट अपर्याप्त साबित होने के बाद न्यायालय ने 3 दिसंबर, 2025 को अधिवक्ता कंवल गोयल को स्थानीय आयुक्त नियुक्त किया। 6 दिसंबर, 2025 को स्थल के निरीक्षण के बाद प्रस्तुत उनकी रिपोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों की पुष्टि की।

48 घंटे में खनन क्षेत्र को सील करने और वीडियोग्राफी का निर्देशः अदालत ने कड़े निर्देशों में
हरियाणा के मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि राज्य पर्यावरण की व्यापक लूट से कैसे निपटेगा और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करेगा। अदालत ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पक्षकार बनाया। चरखी दादरी के उपायुक्त को 48 घंटों के भीतर पूरे खनन क्षेत्र को सील करने और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, 11 दिसम्बर, 2025 के खदान बंद करने के आदेश पर संदेह व्यक्त करते हुए इसे प्रथम दृष्टया केवल लीपापोती बताया गया। आगे की सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तारीख तय की।

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