ED ने अंसल हब-83 से जुड़े रियल इस्टेट फ्रॉड के मामले में 82 करोड़ की अचल संपत्ति की अटैच

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 19 Feb, 2026 11:03 PM

ed attached property of ansal hub in fruad case

एन्फोर्समेट डायरेक्ट्रेट (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस की टीम ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के नियमों के तहत, गुरुग्राम के सेक्टर-83 में मौजूद कमर्शियल प्रोजेक्ट ‘अंसल हब-83’ से जुड़े बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट फ्रॉड को लेकर...

गुड़गांव, (ब्यूरो): एन्फोर्समेट डायरेक्ट्रेट (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस की टीम ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के नियमों के तहत, गुरुग्राम के सेक्टर-83 में मौजूद कमर्शियल प्रोजेक्ट ‘अंसल हब-83’ से जुड़े बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट फ्रॉड को लेकर करीब 82 करोड़ रुपए की अचल प्रॉपर्टी को प्रोविजनली अटैच किया है। 

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यह प्रोजेक्ट करीब ढाई एकड़ ज़मीन पर फैला हुआ है और इसमें 147 कमर्शियल दुकानें, 137 ऑफिस स्पेस और दो रेस्टोरेंट यूनिट हैं। इस मामले की जांच के बाद गुरुग्राम पुलिस द्वारा जून 2023 में धोखाधड़ी की धाराओं में मेसर्स अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पहले मेसर्स अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) के प्रमोटर्स और सीनियर अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

 

इसके फुल टाइम डायरेक्टर कुशाग्र अंसल और इससे जुड़ी एंटिटीज़ मेसर्स सम्यक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। यह जांच हब-83 अलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन की शिकायत पर शुरू की गई थी। एसोसिएशन एक हज़ार से ज़्यादा इन्वेस्टर्स को रिप्रेजेंट करती है, जिन्होंने झूठे भरोसे और गुमराह करने वाली बातों के आधार पर इस प्रोजेक्ट में अपनी मेहनत की कमाई इन्वेस्ट की थी। ईडी की जांच से सामने आया कि प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया था और वैलिड कानूनी मंज़ूरी मिलने से पहले ही इन्वेस्टर्स को कमर्शियल यूनिट्स बेच दी गईं। हालांकि प्रोजेक्ट का लाइसेंस दिसंबर 2015 में खत्म हो गया था, लेकिन डेवलपर्स ने लाइसेंस रिन्यू किए बिना सितंबर 2023 तक इन्वेस्टर्स से पैसे इकट्ठा करना और यूनिट्स बेचना जारी रखा। यह भी पता चला कि कई परेशान इन्वेस्टर्स ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा) में भी शिकायत दर्ज कराई थी कि पज़ेशन में देरी हो रही है, प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो रहा है, गैर-कानूनी तरीके से पैसे इकट्ठा किए जा रहे हैं। 

 

इन्वेस्टर्स को समय पर पज़ेशन और वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन करीब 15 साल बाद भी, कोई ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है और न ही पज़ेशन दिया गया है। इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए नहीं किया गया, बल्कि दूसरे कामों और निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया। साल 2011-2023 के दौरान बेगुनाह अलॉटीज़ से लगभग 82 करोड़ रुपए इकट्ठा किए गए हैं। प्रोजेक्ट की ज़मीन और अब तक हुए कंस्ट्रक्शन को प्रोविजनल तौर पर अटैच कर दिया गया है, जिससे एसेट्स का कोई भी ट्रांसफर, सेल या डिस्पोज़ल रोका जा सके। इसके अलावा, जांच चल रही है। ईडी आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और धोखाधड़ी के शिकार इन्वेस्टर्स के हितों की रक्षा करने के लिए कमिटेड है।

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