Edited By Krishan Rana, Updated: 25 Aug, 2026 02:45 PM

जिस खाकी वर्दी को पहनकर देश सेवा करने का सपना एक 19 साल का युवा रात-दिन देख रहा था, उसी पुलिस की पेलेट गन
झज्जर : जिस खाकी वर्दी को पहनकर देश सेवा करने का सपना एक 19 साल का युवा रात-दिन देख रहा था, उसी पुलिस की पेलेट गन के छरों ने उसकी आंखों के आगे अंधेरा कर दिया। कहानी है जंतर- मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के छर्रे लगने से आंख की रोशनी गंवाने वाले साहिल लोहचब की, जोकि मूल रूप से झज्जर के भूपनियां गांव के रहने वाले हैं।
बता दें कि करीब 10 साल पहले उनका परिवार दिल्ली के नजफगढ़ में किराए के मकान में रहने लगा था। साहिल के पिता दीपक पोलियो की वजह से दिव्यांग हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण साहिल ने बचपन से ही पढ़ाई के साथ काम करना शुरू कर दिया था।
राजधानी दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र साहिल लोचब की जिंदगी 20 जुलाई की दोपहर हमेशा के लिए बदल गई। आज उसी साहिल को इंसाफ दिलाने और दिल्ली पुलिस के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठ गए थे।

साहिल ने बताया कि CJP के प्रोटेस्ट के दौरान पैरामिलिट्री फोर्स की ओर से पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। इसी दौरान उनकी एक आंख और चेहरे पर पैलेट के छर्रे लगे। उनकी एक आंख की रोशनी चली गई, जबकि चेहरे पर भी छर्रों के निशान रह गए। उन्होंने बताया कि घटना के बाद दिल्ली AIIMS में उनका इलाज चला। इसी दौरान राहुल गांधी की टीम से संपर्क हुआ। साहिल के मुताबिक, टीम ने इलाज में मदद की और परिवार का भी सहयोग किया।. राहुल गांधी से उनकी दो बार मुलाकात हो चुकी है।

साहिल के मुताबिक, उनके पिता कभी- कभी प्राइवेट टैक्सी चलाते हैं और परिवार की आय का मुख्य सहारा टैक्सी ड्राइविंग ही है। इसी वजह से उन्होंने भी टैक्सी चलाना शुरू किया। उनका कहना है कि करीब 10-12 साल की उम्र में ही उन्होंने ड्राइविंग सीख ली थी। साहिल ने बताया कि उनके दो छोटे भाई छठी और नौवीं कक्षा में पढ़ते हैं। टैक्सी से होने वाली कमाई का इस्तेमाल पढ़ाई और घर के खर्च में होता था। इसी दौरान उन्होंने दिल्ली पुलिस की परीक्षा की तैयारी शुरू की।
साहिल दिन में चार से पांच घंटे टैक्सी चलाते थे। बाकी बचे समय में घर पर ही ऑनलाइन कोचिंग से दिल्ली पुलिस की तैयारी कर रहे थे। दाहिनी आंख की रोशनी जाने के बाद न तो पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही घर के काम में मदद। उसके सामने अब इलाज के साथ भविष्य की नई चुनौती खड़ी हो गई है।
साहिल लोहचब दिल्ली पुलिस में भर्ती होकर दिव्यांग पिता का सहारा बनना चाहते थे लेकिन उनका यह सपना टूट गया है। आंख की रोशनी जाने वह अब मेडिकल परीक्षा पास नहीं कर सकते। अब उन्हें आगे पुलिस की कार्रवाई का इंतजार है। पुलिस जांच में स्पष्ट करे कि पैलेट गन किसने चलवाई है। उनकी आंख की रोशनी जाने का जिम्मेदार कौन है।
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