Edited By Manisha rana, Updated: 22 Jan, 2026 03:27 PM

हरियाणा में इस साल अप्रैल में राज्यसभा की 2 सीटों को लेकर होने वाले चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच उम्मीदवारों को लेकर सियासी माहौल अभी से गर्माने लगा है और दोनों ही दलों के उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है।
चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा) : हरियाणा में इस साल अप्रैल में राज्यसभा की 2 सीटों को लेकर होने वाले चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच उम्मीदवारों को लेकर सियासी माहौल अभी से गर्माने लगा है और दोनों ही दलों के उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है। विधानसभा में विधायकों के गणित के हिसाब से दोनों ही दलों के पास 1-1 सीट पर जीत दर्ज करने के लिए पर्याप्त संख्या है।
गौरतलब है कि भाजपा की ओर से 10 अप्रैल 2020 को रामचंद्र जांगड़ा एवं कृष्ण लाल पंवार को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था। दोनों ही निर्विरोध यह चुनाव जीते थे। कृष्ण लाल पंवार बाद में प्रदेश की राजनीति में आ गए थे और उन्होंने राज्यसभा सदस्य से इस्तीफा दे दिया था और बाद में 27 अगस्त 2024 को किरण चौधरी को इस सीट से राज्यसभा का सदस्य चुना गया था। अब इन दोनों ही सीटों का कार्यकाल इस साल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है।
सियासी विशलेषकों का मानना है कि इस बार भाजपा के 48 विधायक हैं और कांग्रेस के 37। ऐसे में पूरी संभावना है कि 2 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में दोनों ही दलों को एक-एक पर जीत मिल जाए। इस बार भाजपा को अगर दोनों सीटों पर जीत चाहिए तो उसे दूसरे दलों के करीब 10 विधायकों को अपने साथ जोड़ना होगा, जो वर्तमान परिस्थिति में संभव नजर नहीं आ रहा है।
भाजपा में इन नामों की चल रही चर्चा: विशेष बात यह है कि किरण चौधरी व उनकी बेटी श्रुति चौधरी ने लोकसभा चुनाव के ठीक बाद जून 2024 में कांग्रेस छोड़ दी थी और भाजपा में आ गई थीं। अगस्त 2024 में भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने किरण चौधरी को राज्यसभा में भेज दिया और अक्तूबर 2024 के विधानसभा चुनाव में श्रुति चौधरी को तोशाम से टिकट दिया। श्रुति विधायक निर्वाचित हुई और वर्तमान में प्रदेश सरकार में सिंचाई मंत्री हैं। ऐसे में सियासी विशलेषक मानते हैं कि किरण चौधरी एक बार फिर से राज्यसभा में जाने को लेकर पूरा प्रयास करेंगी। इसके अलावा भाजपा से राज्यसभा की एक सीट के लिए कुलदीप बिश्नोई का नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं। कुलदीप बिश्नोई आदमपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर अगस्त 2022 में भाजपा में शामिल हुए थे। अगर भाजपा अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए किसी जाट चेहरे पर मोहर लगाती तो फिर पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यू एवं ओमप्रकाश धनखड़ का नाम भी चर्चा में है। कैप्टन व धनखड़ दोनों ही 2014 से 2019 तक मनोहर लाल की सरकार में ताकतवर मंत्री रह चुके हैं।
कांग्रेस से अशोक तंवर या बृजेंद्र सिंह हो सकते हैं उम्मीदवारः सियासी विश्लेषकों का मानना है कि इस समय कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा नेता प्रतिपक्ष हैं जो जाट समुदाय से संबंध रखते हैं जबकि पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले राव नरेंद्र सिंह प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। ऐसे में कांग्रेस जातीय संतुलन साधने के मद्देनजर किसी दलित चेहरे को राज्यसभा में भेज सकती है। इसके लिए डा. अशोक तंवर का नाम चर्चा में है। वैसे भी प्रदेश में अनुसूचित समुदाय के 26 फीसदी मतदाता हैं जो एक निर्णायक एवं प्रभावी संख्या है।
ऐसे में राज्यसभा की सीट के लिए कांग्रेस की ओर से डा. अशोक तंवर का नाम सशक्त दावेदारों में शामिल है। अगर कांग्रेस ने दलित चेहरे की बजाय किसी जाट चेहरे पर दांव खेला तो बृजेंद्र सिंह का नाम सबसे ऊपर है। बृजेंद्र 2019 में राजनीति में आए थे और वे हिसार से भाजपा की टिकट पर संसदीय चुनाव में विजयी हुए थे। उनके पिता बीरेंद्र सिंह 5 बार कांग्रेस से विधायक, 1 बार लोकसभा के सदस्य एवं 1 बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। वे एक बार भाजपा से राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं। वर्तमान में बीरेंद्र सिंह व उनके बेटे बृजेंद्र सिंह कांग्नेस में हैं।