3 करोड़ में किडनी, मेदांता अस्पताल तक पहुंचे तार, पुलिस ने किया केस दर्ज

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 21 Jan, 2026 10:09 PM

unknown booked for kidney sale purchase on the name of medanta

साइबर सिटी गुरुग्राम में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों की साख का इस्तेमाल कर मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

गुड़गांव, (ब्यूरो): साइबर सिटी गुरुग्राम में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों की साख का इस्तेमाल कर मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ताजा मामला गुरुग्राम के प्रसिद्ध मेदांता-द मेडिसिटी अस्पताल से जुड़ा है, जहां साइबर अपराधियों ने किडनी खरीदने और बेचने के नाम पर एक बड़ा रैकेट चलाया हुआ था। 

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ठगों ने लोगों को उनकी एक किडनी के बदले तीन करोड़ रुपये देने का लालच देकर उनसे हजारों रुपये की ठगी करने की योजना बनाई। इस सनसनीखेज मामले का खुलासा होने के बाद मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) डॉ. संजय दुरानी की शिकायत पर गुरुग्राम के सदर पुलिस स्टेशन में सोमवार को विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई ।

 

3 करोड़ का ऑफर और फर्जी डॉक्टर का जाल

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार इस पूरे गोरखधंधे की मास्टरमाइंड खुद को प्रिया संतोष बताने वाली एक महिला है। यह महिला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, फर्जी वेबसाइटों और व्हाट्सऐप ग्रुपों के माध्यम से लोगों से संपर्क करती थी। विज्ञापन में दावा किया गया था कि मेदांता अस्पताल को किडनी की सख्त जरूरत है और जो व्यक्ति अपनी किडनी दान करेगा, उसे अस्पताल की ओर से तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि दी जाएगी। ठगों ने इस जालसाजी को असली रूप देने के लिए मेदांता अस्पताल के लोगो और नाम का अवैध रूप से इस्तेमाल कर एक फर्जी वेबसाइट बनाई थी। इतना ही नहीं, महिला आरोपी ने खुद को अस्पताल की डॉक्टर के रूप में पेश किया और एक फर्जी कर्मचारी आईडी का भी उपयोग किया, ताकि लोग आसानी से झांसे में आ सकें।

 

कैसे हुआ इस बड़े घोटाले का खुलासा 

इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के ठगी गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब प्रतीक्षा पुजारी नामक एक महिला ने सीधे अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया। प्रतीक्षा ने अस्पताल को एक ई-मेल भेजकर बताया कि सोशल मीडिया पर किडनी दान के विज्ञापन को देखकर उसने संपर्क किया था। महिला ने खुलासा किया कि खुद को डॉक्टर बताने वाली प्रिया संतोष ने उससे पंजीकरण शुल्क के रूप में आठ हजार रुपये की मांग की। इसके बाद, ठगों ने उसे भरोसा दिलाया कि उसे करोड़ों रुपये की एडवांस राशि जारी की जा रही है, लेकिन इसके बदले उसे 20 हजार रुपये और जमा करने होंगे। जब महिला को शक हुआ और उसने अस्पताल में पड़ताल की, तो पता चला कि मेदांता के नाम पर ठगी का यह मायाजाल फैलाया गया है। अस्पताल की जांच में सामने आया कि प्रिया संतोष नाम की कोई डॉक्टर अस्पताल में नहीं है और उसके द्वारा दी गई स्टॉफ आईडी भी फर्जी है। 

 

छवि बिगाड़ने की साजिश 

मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी ने पुलिस को बताया कि आरोपी महिला द्वारा इस्तेमाल किया गया नाम, स्टाफ आईडी और व्हाट्सऐप नंबर पूरी तरह फर्जी हैं। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी भी प्रकार के अवैध अंग व्यापार या ऐसी किसी वेबसाइट का संचालन नहीं करते हैं। अस्पताल का मानना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह का काम है जो न केवल लोगों को आर्थिक चपत लगा रहा है, बल्कि अस्पताल की वैश्विक छवि को भी धूमिल करने की कोशिश कर रहा है।

 

कानूनी कार्रवाई और पुलिस की जांच

गुरुग्राम पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी प्रिया संतोष और उसके अन्य अज्ञात साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इनमें धारा 318(2), धारा 319 और आईटी एक्ट धारा 66(बी) व 66(डी) की धाराएं लगाई गई है।

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