भजन गायकी में हरियाणा के नीटू चंचल ने बनाई अलग पहचान, अब तक हजारों जागरण एवं चौकियों में कर चुके हैं मां वैष्णो का गुणगान

Edited By Manisha rana, Updated: 08 Mar, 2024 11:23 AM

haryana s neetu chanchal made a distinct identity in bhajan singing

यूं तो भजन गायकी में अनेक कलाकारों ने एक खास मुकाम हासिल किया है, लेकिन आज हरियाणा से संबंध रखने वाले और एक साधारण से परिवार में जन्मे भजन गायक नीटू चंचल ने अपनी गायकी से अपने प्रदेश का नाम पूरे देश में रोशन करते हुए भजन गायकी के क्षेत्र में एक खास...

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा) : यूं तो भजन गायकी में अनेक कलाकारों ने एक खास मुकाम हासिल किया है, लेकिन आज हरियाणा से संबंध रखने वाले और एक साधारण से परिवार में जन्मे भजन गायक नीटू चंचल ने अपनी गायकी से अपने प्रदेश का नाम पूरे देश में रोशन करते हुए भजन गायकी के क्षेत्र में एक खास पहचान बनाई है। प्रदेश के जिला कैथल के मूल निवासी सुशील खुराना उस वक्त सुशील से नीटू चंचल बन गए जब उन्होंने प्रख्यात भजन गायक नरेंद्र चंचल को अपना गुरु धारण करते हुए उन्हीं के अंदाज में माता की भेंटे गाना शुरू किया तो लोगों ने उन्हें नरेंद्र चंचल की आवाज में गाता देख उन्हें सुशील से नीटू चंचल का नाम दे दिया और उसके बाद नीटू चंचल ने अपना पूरा जीवन व दिनचर्या माता रानी को समॢपत करते हुए जागरणों में भजन गायन का जो सिलसिला शुरू किया, तो फिर लगातार सफलता मिलती गई और उन्होंने फिर पीछे मुडक़र नहीं देखा।

वे पिछले करीब साढ़े तीन दशक से भजन गायन के क्षेत्र में अपना एक विशेष नाम अर्जित कर  चुके नीटू चंचल देश के विभिन्न राज्यों में हजारों जागरण एवं चौकियों में शिरकत कर चुके हैं और उनकी दो एलबम भी आ चुकी हैं। देश के अनेक राज्यों में भजन गायकी के जरिए उन्होंने एक विशेष मुकाम हासिल किया है। उनकी गायकी से प्रभावित अनेक ऑडियो व वीडियो कंपनियों ने उन्हें एलबम के लिए ऑफर किया, लेकिन माता वैष्णो देवी को पूरी तरह से समर्पित हो चुके नीटू चंचल ने इस प्रकार की कोई ऑफर को स्वीकार नहीं किया और केवल जागरणों एवं चौकियों में माता रानी के गुणगान को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। 


अपने पिता के साथ बचपन में हनुमान चालीसा का पाठ करते थे नीटू


गौरतलब है कि नीटू चंचल का जन्म 19 सितंबर 1969 को कैथल में हुआ। किसी कारणवश वे अधिक पढ़ नहीं पाए। सातवीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण की। बचपन से ही घर में आध्यात्मिक वातावरण था। उनके पिता वीरभान खुराना कथावाचक एवं भजन गायक थे। ऐसे मेंं स्कूल में नीटू प्रार्थना के समय अक्सर भजन गाते थे। उनके पिता अपने मोहल्ले में स्थित बजरंग भवन मंदिर में शाम को कथावाचन करते थे और नीटू भी अक्सर अपने पिता के साथ वहां जाते और हनुमान चालीसा का पाठ करते थे। उन्होंने 1982 में पहली बार भजन गायक नरेंद्र चंचल को एक जागरण में सुना। उसके बाद नीटू चंचल भी उनके भजन गाने लगे और शुरूआती दौर में कैथल में जगरातों एवं चौकियों में शिरकत करने लगे। कई वर्षों कैथल शहर के सभी ग्रुपों के साथ जगरातों में शिरकत की। शुरू में वे जगरातों में ढोलक बजाते थे और बाद में भजन भी गाने लगे और उसके बाद वे धीरे-धीरे कैथल से बाहर भी भजन गायन के लिए जाने लगे और लोगों में भी उनके गायन के प्रति रुचि बढ़ती गई और सुशील उर्फ नीटू भजन गायकी में कदम आगे बढ़ाते चले गए।


नरेंद्र चंचल से मिलने के बाद जीवन में आया मोड़


साल 1989 में नीटू की मुलाकात एक कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध भजन गायक नरेंद्र चंचल से हुई। उन्होंने नरेंद्र चंचल को अपना गुरु धारण करते हुए शिक्षा-दीक्षा ली। नरेंद्र चंचल का प्रभाव उन पर इस कद्र रहा कि वे जगरातों में उनके भजन गाने लगे। उनकी शैली में ही भजन गाने के चलते ही साल 1990 में जींद के एक जागरण के दौरान उनके प्रशंसकों ने सुनील खुराना की जगह उन्हें नीटू चंचल का नाम दिया। खास बात यह है कि पिछले करीब साढ़े तीन दशक से भजन गायकी कर रहे नीटू चंचल अब तक हजारों की संख्या में जगराते एवं चौकियां कर कर चुके हैं। वे साल में 200 से 250 धार्मिक कार्यक्रमों में भजन गायकी करने जाते हैं। वे अब तक चेन्नई, बंैगलुरू, अहमदाबाद, राजस्थान, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश सहित अनेक जगहों पर जगराते करने के अलावा दो बार सिंगापुर में कार्यक्रम कर चुके हैं। यही नहीं अब तक उनकी दो एलबम आ चुकी हैं। वर्ष 2002 में टी सीरिज के बैनर तले पहले ‘दर तो खाली नी जाणा’ एवं उसके बाद उसी साल ही ‘जागरण की रात’ एलबम आई। जगरातों में अधिक व्यस्तता के चलते बाद में वे कोई एलबम नहीं कर सके। विशेष बात यह है कि वे चैरिटी के लिए भी हर साल धार्मिक आयोजन करते हैं। वे कैथल में अनेक संस्थाओं से जुड़े हैं। मां वैष्णो सेवा समिति कैथल के साथ भी जुड़े हुए हैं और उनकी समिति पिछले 17 वर्षों से कैथल से जाकर कटरा में भंडारा लगाती है। इसी प्रकार से मां चिंतपुर्णी सेवा समिति, यंग स्टार परिवार सिरसा, दुर्गा मंदिर तलवाड़ा, कात्यानी मंदिर दिल्ली, श्री देवी तालाब मंदिर जालंधर, काली माता मंदिर पटियाला सहित अनेक धार्मिक संस्थाओं से वे जुड़े हुए हैं।


प्रधानमंत्री गुजराल भी कर चुके हैं सम्मानित


अपने अब तक के सफर में नीटू चंचल को भजन गायकी को लेकर अनेक मंचों पर सम्मानित होने का अवसर मिला है। साल 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने पंजाब के जालंधर के देवी तालाब मंदिर में विशेष रूप से उन्हें सम्मानित किया था। खुद नीटू चंचल बताते हैं कि ‘अधिक पढ़ा-लिखा नहीं था, तो संघर्ष तो आरंभ से रहा। कैथल की जागरण पार्टियों में ढोलक भी बजाया करता था। कैथल के सभी गु्रपों में काम किया। जीवन यापन के लिए फोटोग्राफी की दुकान की। बाद में किताबों एवं ऑटो पार्टस की भी दुकान की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। मैं मानता हूं कि माता रानी ने मेरे हिस्से में भजन गायकी को ही चुन रखा था और प्रोफेशनल तरीके से 1992 में भजन गायकी में खुद को स्थापित कर पाया।’  खास पहलू यह है कि वे अब तक कटरा में 60 से 70 के करीब कार्यक्रम कर चुके हैं। वैष्णो देवी में साल में 4 से 5 बार गाने का अवसर उन्हें मिलता है। इसी तरह से मां चिंतपूर्णी में भी साल में 3 से 4 बार जगरातों में शिरकत करने का मौका मिलता है। नीटू का कहना है कि उनका विवाह होने के बाद तो उन पर माता रानी की अपार कृपा रही है। वे बताते हैं 19 अक्तूबर 1994 को चंडीगढ़ निवासी सुमन के साथ उनका विवाह हुआ। उनका एक बेटा एवं दो बेटियां हैं। परिवार में माता और चार भाई हैं। उनके अनुसार विवाह के बाद माता रानी पर उनकी बहुत कृपा रही। बेटा कनाडा में पढ़ता है, जबकि एक बेटी चंडीगढ़ में पढ़ती है।
 

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