Edited By Manisha rana, Updated: 09 Jan, 2026 01:10 PM

हरियाणा की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी प्रणाली में किए गए सुधारों का प्रभाव अब जांच की गति और गुणवत्ता पर देखने को मिल रहा है।
चंडीगढ़ : हरियाणा की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी प्रणाली में किए गए सुधारों का प्रभाव अब जांच की गति और गुणवत्ता पर देखने को मिल रहा है। एन.डी.पी.एस. मामलों में अब फॉरेंसिक रिपोर्ट एक माह के भीतर मिल रही है, वाणिज्यिक गुणवत्ता वाले मामलों में यह समय घटकर केवल 15 दिन रह गया है और कुल मामलों के निस्तारण में 28.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि मामलों की संख्या बढ़ने के बावजूद लंबित मामलों में लगभग 12 प्रतिशत की कमी आई है, जो हरियाणा की फॉरेंसिक प्रणाली की वास्तविक क्षमता और दक्षता को दर्शाता है।
इस संबंध में प्रदेश के डी.जी.पी. अजय सिंघल ने बताया कि आने वाले वर्ष में हरियाणा पुलिस का लक्ष्य है कि हर प्रकार की फॉरेंसिक रिपोर्ट अधिकतम 30 दिनों के भीतर उपलब्ध करवाई जाए। इस दिशा में 64 नए पदों का प्रस्ताव रखा गया है और एफ एम.एल., आर.एफ.एस.एल. तथा जिला फॉरेंसिक इकाइयों के लिए 86.38 करोड़ रुपए के आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे। हिसार और पंचकूला में नए डी.एन.ए. डिवीजन स्थापित किए जाएंगे और भोंडसी व हिसार स्थित आर.एफ.एस.एल. भवनों के विस्तार पर 32.58 करोड़ रुपए की स्वीकृत राशि का उपयोग तेजी से किया जाएगा।
फॉरेंसिक साइंस भविष्य की जांच व्यवस्था की नींव
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस सिर्फ जांच का एक हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य की संपूर्ण जांच प्रणाली की नींव है। आने वाले समय में हर अपराध की जांच वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित होगी और पुलिस की पूरी प्रक्रिया फॉरेंसिक सपोर्ट पर निर्भर करेगी। उन्होंन बताया कि हरियाणा पुलिस का लक्ष्य न केवल रिपोर्टिंग को तेज करना है, बल्कि उसे इतना मजबूत और विश्वसनीय बनाना है कि अदालतों में अभियोजन को ठोस समर्थन मिले और निर्दोष व्यक्ति को बिना विलंब न्याय मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा आने वाले वर्षों में फॉरेंसिक रिपोर्टिंग, वैज्ञानिक जांच और तकनीकी उपयोग में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता में बड़ा विस्तार
प्रदेश में फॉरेंसिक सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा मानव संसाधन विस्तार किया। कुल 243 नए पद स्वीकृत किए गए, जिनमें से 97 पदों पर नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं और 323 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेजी से चल रही है। अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों के जुड़ने से जांच की गति बढ़ी है, रिपोर्ट अधिक सटीक और वैज्ञानिक आधार पर तैयार हो रही हैं और फॉरेंसिक कार्यप्रणाली की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्नत डी.एन.ए. डिवीजन और नई प्रयोगशालाएं
एफ.एस.एल. मधुबन के डी.एन.ए. डिवीजन को उन्नत किया गया और आर.एफ. एस. एल. गुरुग्राम में नया डी.एन.ए. डिवीजन स्थापित किया गया, जिससे डी.एन.ए. परीक्षण क्षमता पहले की तुलना में बहुत अधिक बढ़ गई है। हिसार में बैलिस्टिक्स और दस्तावेज परीक्षण की नई प्रयोगशालाएं आरंभ होने से क्षेत्रीय स्तर पर ही तुरंत वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध होने लगी है। भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार अपराध स्थल पर 100 प्रतिशत फॉरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई, जिससे प्रारंभिक जांच और भी मजबूत और प्रमाणिक बनी है। अपराध स्थल पर तुरंत वैज्ञानिक सहायता पहुंचाने हेतु राज्य में 17 नई मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स स्वीकृत की गई और 10 नई जिला फॉरेंसिक लैक्शुरू की गई। राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय से प्राप्त 4 आधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन को भी उपयोग में लाया गया है। इन वैन के कस्टमाइजेशन के लिए 6.71 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जिससे ये वैन जटिल अपराध स्थलों पर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक जांच में सक्षम हुई है।
(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)