क्या हरियाणा कांग्रेस का राज्यसभा में खुलेगा खाता, इन 2 सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल महीने में हो रहा खत्म

Edited By Manisha rana, Updated: 08 Jan, 2026 04:10 PM

haryana congress open its account in the rajya sabha

मौसम में बदलाव के साथ-साथ अप्रैल महीने में हरियाणा की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जिसकी शुरुआत हरियाणा के कोटे से खाली हो रही 2 राज्यसभा सीटों पर नए सदस्यों को चुने जाने से होगी।

चंडीगढ़ (धरणी) : मौसम में बदलाव के साथ-साथ अप्रैल महीने में हरियाणा की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जिसकी शुरुआत हरियाणा के कोटे से खाली हो रही 2 राज्यसभा सीटों पर नए सदस्यों को चुने जाने से होगी। बता दें कि हरियाणा में कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाली पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी का कार्यकाल इसी वर्ष अप्रैल महीने में खत्म हो रहा है। इसी प्रकार भाजपा के दूसरे राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल भी उन्हीं के साथ ही खत्म हो रहा है। जिसके चलते दोनों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस का एक-एक उम्मीदवार जीतना तय माना जा रहा है। भाजपा 48, कांग्रेस 37, इनेलो के दो विधायक हैं अन्य 3 निर्दलीय विधायक  हैं ।

हरियाणा कांग्रेस से तंवर, नरवाल,भारद्वाज?

राजनीतिक चश्मे में सबसे पहले जातिवाद नजर आता है। ऐसा कहने मे कोई अतिशयोक्ति नहीं है। क्योंकि हरियाणा में जाट समाज के बाद अनुसूचित जाति का ही बड़ा दबदबा है। जिसमें जाट जहां लगभग 30% वहीं अनुसूचित जाति 21 प्रतिशत है। जिसमें से लगभग 10 से 12% अकेला चमार या रविदासिया समाज आता है। जिसका राजनीतिक इतिहास कांग्रेस के सबसे वफादार मतदाता के रूप में देखा जाता है। मौजूदा समय में जाट के अलावा उपरोक्त अनुसूचित जाति ही इस मुश्किल दौर में भी कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। जबकि अनुसूचित जाति की अन्य जातियां जिसमें वाल्मीकि, धानक, ओड, सांसी सहित अन्य जातियां डीएससी के वर्गीकरण के चलते बीजेपी के पाले खिसक गई है।  हाल ही में विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर सिरसा लोकसभा से चुनाव लड़ चुके हैं पूर्व सांसद अशोक तंवर जो की विधानसभा चुनाव के समापन से कुछ समय पहले ही कांग्रेस में घर वापसी कर चुके हैं। 

तीनों ही गांधी परिवार के करीबी
 
सामान्य वर्ग से हरियाणा कांग्रेस का युवा ब्राह्मण चेहरा जितेंद्र भारद्वाज  पर भी दांव खेल सकती है। क्योंकि हरियाणा बीजेपी में लगभग एक दर्जन के आसपास विधायक ब्राह्मण समुदाय से हैं।  कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप नरवाल जिन्हें राहुल व प्रियंका का करीबी भी माना जाता है। सूत्रों की माने तो कि अशोक तंवर की दीपेंद्र हड्डा से भी  नजदीकी बढ़ रही हैं।  जबकि हरियाणा कांग्रेस में सबसे अधिक विधायक हुड्डा खेमे से ही हैं ऐसे में कांग्रेस आलाकमान जहां मौजूदा दौर में एक बार फिर से हुड्डा पर मेहरबान है।  उपरोक्त तीनों नेता ही कांग्रेस हाई कमान के करीबी होने से किसी भी नेता को कोई आपत्ति भी नहीं रहेगी। अनुसूचित जाति के कांग्रेस की ओर झुकाव का परिणाम है कि एक या दो नहीं बल्कि फूलचंद मुलाना, अशोक तंवर ,कुमारी शैलजा और उदयभान सिंह लगातार 4 प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जाति से ही बनते रहे हैं।

तंवर को लेकर सोशल मीडिया पर भी चली मुहिम

सोशल मीडिया पर बने चमार वर्ग के पेज पर भी  अशोक तंवर को लेकर राज्यसभा में भेजने की मुहिम चलाई जा रही है। जिसमें प्रदेश के राजनीतिक हिस्सेदारी के आंकड़ों के अनुसार दर्शाया गया है कि जाट समाज के बाद अनुसूचित जाति में चमार समाज का ही सबसे बड़ा संख्या बल है। जो कि लगभग 11% के आसपास है। उक्त पेज पर मांग की गई है कि जैसे हरियाणा नेता विपक्ष के रूप में जाट समाज से  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को फिर से कमान दी गई है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पिछड़े समाज से  राव नरेंद्र सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। जिसे  भाजपा के पिछड़े वर्ग नायब सैनी की काट के रूप में देखा जा रहा है। मौजूदा राजनीतिक हालात में देखा जाए तो ओबीसी समाज का बड़ा मतदाता का झुकाव बीजेपी के पक्ष मे है। जिसके उपहार स्वरूप हरियाणा भाजपा ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को प्रदेश की कमान दोबारा सौंप दी है। उल्लेखनीय है कि अशोक तंवर देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जेएनयू के अध्यक्ष रहने के अलावा युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा वर्ष 2009 सिरसा लोकसभा से सासंद और  फूलचंद मुलाना के बाद सबसे लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके है। 

दावेदारों की लॉबिंग अभी से शुरू

बीते लोकसभा चुनाव में हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में से 5 पर भाजपा व 5 पर कांग्रेस सांसद चुनाव जीते हैं। भाजपा के पांच सांसदों में से तीन मनोहर लाल (करनाल), कृष्णपाल गुर्जर (फरीदाबाद) और राव इंद्रजीत (गुरुग्राम) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट में मंत्री के तौर पर हरियाणा की जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जबकि दो सीटों पर धर्मवीर सिंह (भिवानी) और नवीन जिंदल (कुरुक्षेत्र) चुनाव जीते हैं। वहीं कांग्रेस की 5 सीटों पर रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा, अंबाला से वरुण मुलाना, सोनीपत से सतपाल ब्रह्मचारी, हिसार से जयप्रकाश जेपी और सिरसा से कुमारी सैलजा सांसद चुने गए हैं।

प्रदेश की सत्ताधारी भाजपा में दावेदारों की लंबी चौड़ी फेहरिस्त है

 जिसमें संभवत दोनों ही वर्तमान उम्मीदवार किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा दोबारा जाने के अलावा पंजाबी समुदाय से करनाल से पूर्व सांसद संजय भाटिया ,सीएम के राजनैतिक सचिव तरुण भंडारी ,पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर या  कोई और पंजाबी चेहरा बड़ा दावेदार हो सकता है ।क्योंकि फिलहाल पंजाबी चेहरे में से कोई भी राज्यसभा में नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ी दावेदारी पंजाबी समुदाय की मानी जा रही है। हालांकि कैप्टन अभिमन्यु, ओमप्रकाश धनखड़ प्रदेश भाजपा के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी के बड़े जाट चेहरे हैं। फिलहाल रामचंद्र जांगड़ा पिछड़ा वर्ग, किरण चौधरी तथा सुभाष बराला जाट समाज, इसके अलावा रेखा शर्मा और निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा जो कि भाजपा के समर्थन से बने हैं दोनों ही ब्राह्मण समाज से हैं। ऐसे में राजनीतिक पंडितों की माने तो सभी लोगों के हिस्सेदारी को देखते हुए पंजाबी वैश्य या फिर अनुसूचित जाति के किसी नेता की लॉटरी भी लग सकती है।क्योंकि प्रदेश में मुख्यमंत्री का पद भी पिछड़े वर्ग के रूप में नायब सैनी के पास है। यह देखने वाली बात होगी की कांग्रेस के अलावा बीजेपी से भी अगला राज्यसभा सदस्य कौन होगा लेकिन भाजपा की रणनीति हमेशा चौकाने वाली  ही होती है।
 

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!