AJL प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व सीएम हुड्डा को CBI कोर्ट से बड़ी राहत(VIDEO)

Edited By Deepak Paul, Updated: 03 Jan, 2019 12:08 PM

AJL प्लॉट आवंटन मामले में आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व मोती लाल वोहरा को सीबीआई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। आज कोर्ट ने सुनवाई के बाद भूपेंद्र सिंह हुंड्डा और मोती लाल वोहरा को जमानत दे दी ।

पंचकूला(उमंग): AJL प्लॉट आवंटन मामले में आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व मोती लाल वोहरा को सीबीआई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सीबीआई की अदालत ने पंचकुला में गैरकानूनी तरीके से भूखंड का पुन:आवंटन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को करने के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और कांग्रेस के नेता मोतीलाल वोरा जमानत दे दी है। दोनों आरोपियों को 5 - 5 लाख रुपये के बेल बांड पर जमानत दी गई। साथ ही दोनों को चार्जशीट की कॉपी भी सौंपी गई। मामले को लेकर अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी,  सुनवाई पर आरोपों पर बहस की जाएगी। जिसके बाद आरोप तय किए जाएंगे।

मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व मोती लाल वोहरा पेश हुए। पिछली सुनवाई में हुड्डा और वोहरा दोनों को पेश होने के लिए समन भेजे गए थे। दोनों के खिलाफ मामले में एक दिसंबर को चार्जशीट दाखिल की गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तत्कालीन समय में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन थे। वहीं आरोपी मोती लाल वोहरा AJL हाउस के चेयरमैन थे।

जानिए मामला 
24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन सीएम चौधरी भजनलाल ने एजेएल को अलॉट कराया। कंपनी ने 10 साल तक कंस्ट्रक्शन नहीं किया तो 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट पर वापस कब्जा ले लिया। तभी28 अगस्त 2005 को तत्कालीन सीएम हुड्‌डा ने अफसरों के मना करने के बावजूद एजेएल को 1982 की मूल दर पर ही प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए।तब पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा हरियाणा के सीएम थे, इसी दौरान पंचकूला में एसोसिएट जर्नल लिमिटेड को जमीन आबंटित की थी। 

आरोप है कि एजेएल को यह जमीन आबंटित करने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। एजेएल को हुए इस जमीन आवंटन के चलते राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के रेवेन्यू का नुकसान हुआ। जब यह इंडस्ट्रियल प्लॉट आबंटित हुए तब हुड्डा हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन थे। ये प्लॉट 496 स्केवयर मीटर से लेकर 1280 स्केवयर मीटर तक के थे, जिसके लिए हुड्डा के पास 582 आवेदन आए थे। अलॉटमेंट के लिए 14 का चयन किया गया था। 


इनमें नियमों की अनदेखी करने का आरोप है। खट्टर सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी थी। विजिलेंस ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

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