जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का मामला, गन्नौर के नायब तहसीलदार पर कार्रवाई, पंचकूला मुख्यालय अटैच

Edited By Manisha rana, Updated: 26 Jan, 2026 11:42 AM

fake land registration case

गन्नौर तहसील में सामने आए जमीन की फर्जी रजिस्ट्री मामले में गाजा फिलहाल नायब तहसीलदार अमित कुमार पर गिरी है। गंभीर लापरवाही और नियमों की अनदेखी के आरोपों के चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से फील्ड ड्यूटी से हटाकर पंचकूला स्थित मुख्यालय से अटैच कर दिया...

सोनीपत (ब्यूरो) : गन्नौर तहसील में सामने आए जमीन की फर्जी रजिस्ट्री मामले में गाजा फिलहाल नायब तहसीलदार अमित कुमार पर गिरी है। गंभीर लापरवाही और नियमों की अनदेखी के आरोपों के चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से फील्ड ड्यूटी से हटाकर पंचकूला स्थित मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। डी.सी. सुशील सारवान ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एफ.सी. आर. विभाग को 22 जनवरी को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इससे पहले ए.डी.सी. को जांच सौंपी गई थी।

जांच के आदेश वित्त आयुक्त एवं राजस्व विभाग (एफ.सी.आर.) स्तर से जारी किए गए हैं। निर्देशों मे स्पष्ट किया गया है कि विवादित रजिस्ट्री से जुड़े सभी मूल दस्तावेजों के साथ नायब तहसीलदार को जांच के दौरान उपस्थित होना होगा ताकि यह तय किया जा सके कि रजिस्ट्री के समय नियमों और प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। फर्जी रजिस्ट्री मामले को लेकर अतिरिक्त उपायुक्त, सोनीपत ने भी उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें रजिस्ट्री प्रक्रिया में प्राथमिक स्तर पर गंभीर चूक की बात सामने आई है। वहीं पुलिस आयुक्त सोनीपत ने कार्रवाई को लेकर विभागीय पत्राचार किया है। पत्र में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आपराधिक लापरवाही और नियम उल्लंघन की जांच का उल्लेख किया गया है। राजस्व विभाग की जांच में रजिस्ट्री प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या मिलीभगत की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला

गन्नौर क्षेत्र में दिल्ली की एक रियल एस्टेट कंपनी की करीब 4.5 एकड़ जमीन, जिसकी बाजार कीमत लगभग 50 करोड़ रुपए बताई जा रही है, उसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मात्र 6.16 करोड़ रुपए में बेच दिया गया। फर्जी विक्रेता ने कंपनी का नकली अथॉरिटी लैटर तैयार किया। खरीदार, गवाह, नंबरदार और डीड राइटर तक के दस्तावेजों में गड़बड़ियां सामने आईं, इसके बावजूद रजिस्ट्री कर दी गई। मामला उजागर होने के बाद न तो रजिस्ट्री रद्द की गई और न ही तुरंत आपराधिक कार्रवाई हुई, जिससे पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

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