Edited By Isha, Updated: 03 Jul, 2026 06:46 PM
हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने शुक्रवार को कोलकाता स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में पश्चिम बंगाल विधान सभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में 'भारतीय
चंडीगढ़ ( चन्द्र शेखर धरणी ): हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने शुक्रवार को कोलकाता स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में पश्चिम बंगाल विधान सभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में 'भारतीय विधानमंडलों में समिति प्रणाली' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां लोकतांत्रिक जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रभावी शासन की आधारशिला हैं तथा भविष्य की समिति प्रणाली को शोध-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम, ज्ञान-आधारित और नागरिक-केंद्रित बनाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि विधान मंडल केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यय पर निगरानी रखने, कार्यपालिका को जवाबदेह बनाने तथा पारदर्शी शासन सुनिश्चित करने का भी संवैधानिक दायित्व निभाता है। सदन जहां लोकतंत्र की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं संसदीय समितियां उसकी विवेकपूर्ण शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। समितियां सीमित समय में संभव न हो पाने वाले विषयों की गहन, निष्पक्ष और तथ्याधारित समीक्षा करती हैं।
विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और डिजिटल प्रशासन जैसे जटिल विषयों पर गहन अध्ययन और विशेषज्ञों के साथ संवाद की आवश्यकता है। ऐसे में संसदीय समितियां नीति, बजट और विधायी प्रस्तावों की गंभीर समीक्षा कर साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करती हैं।
उन्होंने कहा कि समितियों की वास्तविक सफलता बैठकों या रिपोर्टों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि उनकी सिफारिशें शासन व्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन में कितना सकारात्मक परिवर्तन लाती हैं।
विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी संसदीय समिति की प्रभावशीलता उसके अध्यक्ष, सदस्यों, विधायी सचिवालय और कार्यपालिका के रचनात्मक सहयोग पर आधारित होती है। समिति के सदस्यों को बैठक से पहले एजेंडा और संबंधित दस्तावेजों का गंभीर अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि सार्थक विचार-विमर्श की शुरुआत बैठक से पहले ही हो जाती है। उन्होंने कहा कि समितियों की सबसे बड़ी शक्ति राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सर्वसम्मति विकसित करने की क्षमता है।
उन्होंने विधायी सचिवालय की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आधुनिक सचिवालय केवल प्रशासनिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि विधायी शोध, विश्लेषण, कार्यवाही की निगरानी और संस्थागत ज्ञान के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाता है।
उन्होंने हरियाणा विधान सभा के अनुभव साझा करते हुए बताया कि नियमित समिति बैठकें, समयबद्ध दस्तावेज वितरण, क्षमता निर्माण और ओरिएंटेशन कार्यक्रमों के माध्यम से समिति प्रणाली को निरंतर मजबूत किया जा रहा है। इसी सोच के तहत हरियाणा विधानसभा में संसदीय अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र (पीआरआईसी) की स्थापना की गई है, जो सदस्यों को शोध सामग्री, नीति विश्लेषण और ज्ञान-आधारित सहयोग उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की प्राप्ति में संसदीय समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के शब्दों का उल्लेख करते हुए आशा व्यक्त की कि देश की विधान सभाएं ऐसी संस्थाएं बनें, जहां ज्ञान विचार-विमर्श का मार्गदर्शन करे, सत्यनिष्ठा नेतृत्व को प्रेरित करे, नवाचार जवाबदेही को सुदृढ़ बनाए और लोकसेवा सर्वोच्च संवैधानिक कर्तव्य बनी रहे।