इंतकाल के नाम पर रिश्वतखोरी ; हांसी में ACB ने रिश्वत लेते हुए पटवारी और सहयोगी को रंगे हाथ दबोचा

Edited By Krishan Rana, Updated: 04 Jun, 2026 08:40 PM

bribery over property transfer acb apprehends patwari and accomplice while acce

हांसी में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने वीरवार शाम बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी के लिए रिश्वत की

हांसी (संदीप सैनी): हांसी में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने वीरवार शाम बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी के लिए रिश्वत की राशि लेते उसके कथित मध्यस्थ को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस मामले में पटवारी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। कार्रवाई भिवानी और हिसार एसीबी टीम की संयुक्त कार्रवाई के तहत की गई।

एसीबी के इंचार्ज जगजीत ने बताया कि बवानीखेड़ा निवासी श्रवण ने शिकायत दी थी कि उसकी माता के नाम प्रेम नगर में एक प्लॉट है, जिसके इंतकाल (म्यूटेशन) की प्रक्रिया पूरी करवाने के बदले संबंधित पटवारी ने ₹20,000 रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई।

वीरवार को तय राशि का आधा हिस्सा ₹10,000 देने का समय निर्धारित किया गया। एसीबी टीम ने जाल बिछाया और महादेव ढाबा संचालक पवन कुमार को रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथों काबू कर लिया। जांच में सामने आया है कि पवन कुमार ने यह राशि कथित रूप से पटवारी विशाल के कहने पर ली थी।

कार्रवाई के दौरान टीम ने आरोपी के कब्जे से ₹500 के नोटों में कुल ₹10,000 की रिश्वत राशि बरामद की। साथ ही मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों में इंतकाल रजिस्टर को भी जब्त कर लिया गया है। एसीबी अधिकारी इंस्पेक्टर जगजीत के अनुसार पटवारी विशाल को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है तथा उसका मेडिकल परीक्षण करवाया जाएगा। जांच के दौरान यह भी खंगाला जा रहा है कि रिश्वत मांगने और राशि प्राप्त करने में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका रही।

यह कार्रवाई हांसी की पुरानी तहसील के नजदीक स्थित कार्यालय क्षेत्र में की गई। ट्रैप कार्रवाई में इंस्पेक्टर मुकेश, एएसआई रेनू, हेड कांस्टेबल कुलदीप, हेड कांस्टेबल नवीन और दिनेश शामिल रहे। वहीं जिला मत्स्य अधिकारी भिवानी सुरेंद्र कुमार ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की भूमिका निभाई।

इंस्पेक्टर जगजीत ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी कार्य के बदले रिश्वत या अवैध धनराशि की मांग करता है तो इसकी सूचना तुरंत एंटी करप्शन ब्यूरो या विजिलेंस विभाग को दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और विभाग द्वारा पूरी कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। फिलहाल एसीबी की टीम मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ आगामी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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