कैथल सहित विभिन्न जिलों में नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ी

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Sunday, January 14, 2018-12:36 PM

कैथल(ब्यूरो):हरियाणा का युवा नशीले पदार्थों की चपेट में है, सरकार को खबर है, पर लोगों को खबरदार करने की मशीनरी के पेच फिलहाल ढीले दिख रहे हैं, जिस कारण ऐसे पदार्थों की तस्करी आम बात हो कर रह गई है। स्वयं सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अढ़ाई करोड़ की आबादी वाले इस प्रदेश के कैथल सहित 18 जिलों की सीमा किसी न किसी राज्य से लगती है।आंकड़े बताते हैं कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने सत्ता सम्भालने के बाद नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने व नशीला माल जब्त करने का जो अभियान चलाया है, उसका असर कैथल के गुहला-चीका सहित अन्य जिलों में भी दिखा है

 पंजाब स्पैशल टॉस्क फोर्स ने 6 माह की अवधि में 7000 लोगों को गिरफ्तार किया वह अपने आप में एक रिकार्ड है। हरियाणा में उक्त अवधि में 7 किलो 325 ग्राम हीरोइन की वसूली हुई जबकि पंजाब में अगस्त 2017 तक 248 कि.ग्रा. हीरोइन पकड़ी गई। पंजाब में इस प्रकार के  बढ़ते दबाव के लिए तस्करों के लिए राज्य में पनाह आसान बन गई है क्योंकि हरियाणा में प्रवेश करने के लिए उन्हें किसी प्रकार की सीमा को नहीं लांघना पड़ता बल्कि गांवों से होकर ही आसान रास्ते पार कर वे मांग को पूरी कर रहे हैं। 

केंद्र ने जारी की प्रोत्साहन नीति
पश्चिमी उत्तरप्रदेश, से लेकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में जहां तस्करी का कारोबार बढऩे से पुलिस व अन्य एजेंसियों के पसीने छूटे हैं। वहीं अब केंद्र सरकार ने एन.डी.पी.एस. उत्पादों व पदार्थों पर नकेल डालने के लिए जो नई पॉलिसी बनाई है उससे इन राज्यों के युवाओं को बड़ी राहत मिल सकेगी। केंद्र ने ऐसे पदार्थों को जब्त करने वाले कर्मचारियों को 20 लाख तक ईनाम देने का ऐलान किया है। यह नीति उस व्यक्ति पर भी लागू होगी जो पुलिस या एस.टी.एफ. को गोपनीय जानकारी देगा।

सरकार के पास नीति बनाने का समय नहीं: अभय
हरियाणा सरकार तरह-तरह के नियम व कायदे रोज बनाकर सुर्खियां बटोर रही है लेकिन इस ओर राज्य नेतृत्व का ध्यान ही नहीं है कि प्रदेश के युवाओं को नशे से कैसे बचाया जाए। मैं तो यह कहूंगा कि सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस गम्भीर मसले पर सरकार चर्चा करे और कड़ा कानून बनाने के साथ-साथ पंजाब एवं हरियाणा की पुलिस संयुक्त जागरूकता अभियान चलाए ताकि युवाओं को पथ-भ्रष्ट होने से रोका जा सके। यथा सम्भव सामाजिक संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए।

सरकार पूरी तरह से गम्भीर : विज
हरियाणा सरकार नशीले पदार्थों की तस्करी के प्रति पूरी तरह से गम्भीर है। हमारा प्रयास है कि युवा ही क्यों कोई भी हरियाणवी नशे का प्रयोग न करे। पुलिस भर्ती के दौरान यह प्रकाश में आया था कि कुछ युवा नशा करते हैं, जिसके बाद राज्य पुलिस पूरी तरह से सतर्कता बरत रही है। जहां जरूरी होगा विशेष अभियान चलाए जाएंगे। एन.डी.पी.एस. कानून पहले ही काफी सख्त है, उसका क्रियान्वयन पूरी ईमानदारी से हो, ऐसे हमने पहले ही आदेश पुलिस को दे रखे हैं। हमारी सरकार इसलिए खेलों व खिलाडिय़ों के लिए उदार व आकर्षक नीति बना रही है ताकि युवा नशा छोड़ खेलों से जुड़ें।

नेपाल से आती है 3 तरह की चरस
नेपाल से तस्करी की जाने वाली चरस 3 प्रकार की है। सबसे अच्छी क्वालिटी की चरस परफोरेटेड, फिर स्मोक्ड और फिर बट्टी आती है। सभी के मूल्य में 10 से 15 हजार रुपए तक का अंतर है। हरियाणा व पंजाब में सर्वाधिक मांग स्मोक्ड श्रेणी की चरस की है। बरेली से पकड़े गए एक तस्कर ने केंद्रीय एस.टी.एफ. को पूछताछ में बताया कि जब्त की गई 42 कि.ग्रा. खेप की आपूर्ति इन दोनों राज्यों में की जानी थी। अपराधियों के तार लम्बे अरसे से राजनीतिज्ञों के अलावा पुलिस से जुड़े रहे हैं। ऐसे लोगों का खुलासा बरेली से पकड़े बड़े तस्कर और यू.पी. के बाराबंकी जिले में काबू किए श्रीलंका के 2 नागरिकों से पूछताछ के दौरान हुआ बताया गया है। 

नशामुक्ति केंद्रों में सर्वाधिक युवा
आसान आपूर्ति होने के कारण सीमावर्ती जिलों के युवाओं में इसका प्रचलन बढ़ा है। नशीली गोलियां व कैप्सूल की मांग भी बीते 2 सालों में राज्य में अधिक बढ़ी है। पी.जी.आई.एम.एस. रोहतक में स्थित नशा मुक्ति केंद्र में वर्ष 2011 में जहां 842 युवा इस लत से मुक्ति के लिए पहुंचे जबकि वर्ष 2015 में यह संख्या 3400 के करीब पहुंच गई। पी.जी.आई.एम.एस व अन्य नशा मुक्ति केंद्रों में पहुंचे मरीजों की संख्या वर्ष 2016 में 4000 का आंकड़ा पार कर गई। इन संस्थानों के एडमिशन संबंधी रिकार्ड से यह भी पुष्टि हुई है कि राज्य के कैथल, अम्बाला, हिसार, गुरुग्राम, करनाल, सिरसा, नारनौल और कुरुक्षेत्र सर्वाधिक युवा नशे का इलाज करवाने पहुंचे हैं और उनकी आयु 17 से लेकर 36 साल तक पाई गई है। अब 2017 भी चला गया लेकिन संख्या में कमी नहीं आई जो यह स्पष्ट संकेत हैं कि नशे में संलिप्त युवा अब बेलगाम हो गया है। 
 

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