अनुशासन का नाम ही भाजपा है, विचारों की भिन्नता फूट नहीं: रामबिलास शर्मा

Edited By Manisha rana, Updated: 29 Jan, 2026 05:02 PM

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हरियाणा भाजपा के आधार स्तंभ और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा ने दक्षिण हरियाणा के नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगा दिया है।

​महेंद्रगढ़: हरियाणा भाजपा के आधार स्तंभ और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा ने दक्षिण हरियाणा के नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि नेताओं के अलग-अलग विचारों को गुटबाजी या फूट समझना गलत है, क्योंकि यह 'वन मैन शो' नहीं बल्कि एक जीवंत लोकतंत्र है जहां मर्यादा में रहकर असहमति दर्ज करना अनुशासनहीनता नहीं कहलाती।

रामबिलास शर्मा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2024 के चुनाव में उनका टिकट कटने से उनके समर्थकों में भारी मायूसी देखी जा रही है। हालांकि, प्रोफेसर शर्मा का पूरा जीवन व्यक्तिगत हितों के बजाय संगठन के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा है। रामबिलास शर्मा का विवाह 15 जून 1970 को हुआ था, लेकिन मात्र 14 दिन बाद 29 जून 1970 को वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में रोहतक चले गए और जीवन पर्यंत संघ के लिए दिन-रात कार्य किया।

30 नवंबर 1975 को देश में कांग्रेस सरकार द्वारा थोपे गए आपातकाल के दौरान रोहतक जिले के आठ संघ कार्यकर्ताओं को झज्जर थाने में 22 दिनों तक अवैध रूप से बंद रखा गया था। उनकी गिरफ्तारी तक नहीं दिखाई गई थी। इस अन्याय के विरोध में प्रेमजी गोयल के नेतृत्व में सापला के पास अटायला गांव के एक ईख के खेत में गुप्त बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि झज्जर थाने में बंद अमरचंद बब्बर, श्याम बसरिजा, जगदंबा प्रसाद, मदनलाल हरजाई सहित आठों कार्यकर्ताओं को विधिवत जेल भिजवाया जाए। इस कार्य की जिम्मेदारी तत्कालीन संघ प्रचारक प्रो.रामबिलास शर्मा को सौंपी गई। ड्यूटी के अनुसार जब वे नाहड़ चौकी पहुंचे तो मेहता थानेदार के नेतृत्व में पुलिस ने उन्हें घेर लिया और बेरहमी से लाठीचार्ज किया। उस समय जनसंघ द्वारा प्रकाशित ‘दर्पण’ समाचार पत्र सहित अन्य अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपी, जिससे सरकार दबाव में आ गई और झज्जर थाने में बंद आठों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी दिखाकर उन्हें जेल भेजा गया।

प्रोफेसर रामबिलास शर्मा को 30 नवंबर से 4 दिसंबर तक झज्जर जेल में रखा गया। बाद में मीसा कानून के तहत मामला बनाकर उन्हें रिमांड पर अंबाला जेल भेज दिया गया, जहां एक एसपी रैंक के अधिकारी कंग और इंस्पेक्टर रैंक के कर्मचारी मलिक द्वारा उन पर गंभीर यातनाएं दी गईं। उन्होंने अपनी पीड़ा का विवरण किसी तरह एक पत्र के माध्यम से प्रेम सागर तक पहुंचाया। इस पत्र के आधार पर प्रेम सागर और उनकी पत्नी अन्नपूर्णा ने ‘तानाशाही से जूझता हरियाणा’ पत्रिका में जेल में दी गई यातनाओं का विस्तृत वर्णन प्रकाशित किया, जिससे प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया। सरकार ने घबराकर अंबाला जेल में बंद सूरजभान को भागलपुर, पीसी जैन को मुजफ्फरनगर और प्रोफेसर रामबिलास शर्मा को बिहार की गया जेल भेज दिया। वहां भी उन्हें एक छोटी कोठरी में बंद कर कठोर यातनाएं दी गईं। 

18 जनवरी 1977 को संघ से प्रतिबंध हटने और देश में चुनाव होने के बाद मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। इसके पश्चात प्रोफेसर रामबिलास शर्मा की गया जेल से रिहाई हुई। उसी वर्ष उन्होंने महेंद्रगढ़ विधानसभा से पहला चुनाव लड़ा, जिसमें वे मात्र 673 मतों से पराजित हुए। 1982 में वे पहली बार विधायक बने और इसके बाद पांच बार महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1991 में हरियाणा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सभी 90 विधानसभा सीटों पर पार्टी को चुनाव लड़वाया। उस चुनाव में भाजपा को 11 प्रतिशत मत प्राप्त हुए और केवल दो विधायक—शाहाबाद से खैराती लाल शर्मा एवं महेंद्रगढ़ से स्वयं प्रोफेसर रामबिलास शर्मा—विजयी हुए, जिससे प्रदेश में भाजपा की पहचान बनी। 5 जनवरी 2013 को वे पुनः हरियाणा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए। उनके नेतृत्व में 2014 का विधानसभा चुनाव लड़ा गया, जिसमें भाजपा ने 47 सीटें जीतकर पहली बार हरियाणा में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। विधायक दल की बैठक में केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर प्रोफेसर रामबिलास शर्मा ने मनोहर लाल के नाम का मुख्यमंत्री पद के लिए प्रस्ताव रखा और मनोहर लाल मुख्यमंत्री बने, जब कि स्वयं रामबिलास शर्मा मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गए। 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी द्वारा उनका टिकट काटे जाने से समर्थकों में व्यापक मायूसी देखी गई। 

अटल बिहारी वाजपेई सरकार बचाने में प्रोफेसर रामबिलास शर्मा की ऐतिहासिक भूमिका

केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं था। ऐसे में हरियाणा से चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के चार लोकसभा सांसदों का समर्थन सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। उस समय हरियाणा में हविपा-भाजपा गठबंधन की सरकार थी और चौधरी बंसीलाल मुख्यमंत्री थे। भाजपा के 11 विधायक थे तथा प्रो. रामबिलास शर्मा हरियाणा भाजपा विधायक दल के नेता थे। चौधरी ओमप्रकाश चौटाला केंद्र में एनडीए सरकार को समर्थन देने के बदले हरियाणा में चौधरी बंसीलाल सरकार से समर्थन वापस लेकर स्वयं मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। इस राजनीतिक परिस्थिति में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे के नेतृत्व में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई, केंद्रीय मंत्री प्रमोद महाजन, हरियाणा भाजपा विधायक दल के नेता प्रो.रामबिलास शर्मा तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णलाल शर्मा की उपस्थिति में प्रधानमंत्री आवास पर महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में  केंद्रीय भाजपा नेताओं ने एक महत्वपूर्ण  निर्णय लिया ।

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