Edited By Krishan Rana, Updated: 31 May, 2026 08:09 PM

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के हौंद-चिल्हड़ गांव में वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान हुआ नरसंहार देश के
रेवाड़ी (महेंद्र भारती) : हरियाणा के रेवाड़ी जिले के हौंद-चिल्हड़ गांव में वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान हुआ नरसंहार देश के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक है। 2 नवंबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़की हिंसा के दौरान दंगाइयों की एक बड़ी भीड़ गांव में पहुंची और चार घंटे तक लूटपाट, आगजनी व हिंसा का तांडव मचाया।
इस दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित 30 से अधिक सिखों को जिंदा जला दिया गया या मौत के घाट उतार दिया गया। पूरा गांव आग की लपटों में घिर गया और देखते ही देखते एक आबाद बस्ती वीरान हो गई। इस भयावह घटना के बाद कभी हंसते-खेलते और खुशहाल रहे इस गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। समय के साथ हौंद-चिल्हड़ को "बेचिराग गांव" के नाम से भी जाना जाने लगा, क्योंकि नरसंहार के बाद यहां का जीवन लगभग उजड़ गया और अनेक परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो गए।
घटना के बाद गांव के तत्कालीन सरपंच ने पुलिस में मामला दर्ज कराया, लेकिन आरोप है कि लंबे समय तक न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही पीड़ितों के पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह रहा कि हौंद-चिल्हड़ नरसंहार लगभग 26 वर्षों तक देश-दुनिया की नजरों से ओझल रहा।
वर्ष 2011 में गुरुग्राम के इंजीनियर मनविंदर सिंह गियासपुरा द्वारा इस घटना को सामने लाने के बाद यह दर्दनाक सच फिर चर्चा में आया। आज भी गांव में मौजूद टूटी-खंडहर हवेलियां, जले हुए मकानों के अवशेष और उजड़े ढांचे 1984 के उस नरसंहार की गवाही दे रहे हैं। ये खामोश दीवारें उस दर्द, भय और तबाही की मूक साक्षी हैं, जिसने एक पूरे गांव की पहचान, खुशियां और भविष्य छीन लिया था। हौंद-चिल्हड़ की खंडहर हवेलियां आज भी उस काले अध्याय की याद दिलाती हैं, जिसे इतिहास कभी भुला नहीं सकता।
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