Edited By Krishan Rana, Updated: 15 Aug, 2026 12:02 PM
हरियाणा की राजनीति केवल विभिन्न दलों की सरकार बनने और बदलने का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नेताओं की कहानी भी
हरियाणा डेस्क : हरियाणा की राजनीति केवल विभिन्न दलों की सरकार बनने और बदलने का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नेताओं की कहानी भी है जिन्होंने अपने व्यक्तित्व, फैसलों, कार्यशैली और जनाधार से प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दी। हरियाणा का गठन 1 नवम्बर 1966 को हुआ। पिछले लगभग 60 वर्षों में प्रदेश की राजनीति ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं।
इस पूरे दौर में कई नेता मुख्यमंत्री बने लेकिन कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन, जनाधार और रिकॉर्ड के कारण अलग पहचान बनाई। इनमें सबसे प्रमुख रहे चौधरी देवीलाल, चौधरी बंसीलाल और चौधरी भजनलाल। हरियाणा की राजनीति में इन तीनों नेताओं को 'तीन लाल' के नाम से जाना जाता है। इन तीनों नेताओं ने मिलकर लगभग 28 वर्षों तक हरियाणा का नेतृत्व किया। मुख्यमंत्री के रूप में शासन करने के साथ साथ तीनों ने राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तीनों केंद्रीय मंत्री रहे, तीनों ने कांग्रेस से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और बाद में अलग होकर अपने अपने क्षेत्रीय दल बनाए। इन तीनों लालों के परिवार के सदस्य भी आज हरियाणा की राजनीति में एक खास पहचान रखते हैं और उनकी सियासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि साल 2014 में हरियाणा की राजनीति में एक और नया अध्याय जुड़ा। भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोहर लाल पहली बार मुख्यमंत्री बने और उन्होंने लगातार सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इसी कारण राजनीतिक विश्लेषक उन्हें हरियाणा की राजनीति का 'चौथा लाल' भी कहने लगे।
खास बात यह है कि इन चारों ही सियासी लालों के नाम ऐसे अनेक अनूठे रिकॉर्ड हैं जिनकी वजह से इनको राष्ट्रीय पटल की सियासत पर एक खास पहचान मिली। अहम बात यह है कि हरियाणा की सियासत में मनोहर लाल ऐसे सियासी 'लाल' हैं, जिनका कोई भी पारिवारिक सदस्य राजनीति में सक्रिय नहीं है। मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री के रूप में लगातार सत्ता में बने रहकर उन्होंने भी एक नया रिकॉर्ड बनाया है और वह अब भी निरंतर सत्ता में बने हुए हैं।
तीनों 'लालों' में रही हैं ये समानताएं
हरियाणा की राजनीति के तीनों प्रमुख नेताओं चौधरी देवीलाल, चौधरी बंसीलाल और चौधरी भजनलाल के राजनीतिक जीवन में कई दिलचस्प समानताएं देखने को मिलती हैं। तीनों ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत कांग्रेस पार्टी से की, लेकिन समय के साथ राजनीतिक मतभेदों के कारण कांग्रेस छोड़कर अपने-अपने क्षेत्रीय दलों का गठन किया।
चौधरी देवीलाल ने कांग्रेस छोड़ने के बाद लोकदल और जनता दल के माध्यम से किसान राजनीति को नई दिशा दी तथा बाद में हरियाणा लोकदल का गठन किया। चौधरी बंसीलाल ने भी लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद हरियाणा विकास पार्टी बनाई और भाजपा के सहयोग से तीसरी बार मुख्यमंत्री बने।
वहीं चौधरी भजनलाल ने अपने बेटे कुलदीप बिश्नोई के साथ 2007 में कांग्रेस छोड़कर हरियाणा जनहित कांग्रेस बनाकर प्रदेश की राजनीति में नया समीकरण खड़ा किया। तीनों नेता हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे, तीनों ने केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाला और तीनों ने अपने अपने समय में प्रदेश की राजनीति पर गहरी छाप छोड़ी। यही वजह है कि हरियाणा की राजनीति में 'तीन लाल' का दौर आज भी सबसे प्रभावशाली राजनीतिक अध्यायों में गिना जाता है।
विधायक से उपप्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे चौ. देवीलाल गौरतलब है कि हरियाणा की राजनीति में चौधरी देवीलाल का नाम किसान आंदोलन और जनसंघर्ष की राजनीति का पर्याय माना जाता है। वह प्रदेश के ऐसे इकलौते नेता हैं जो 2 बार भारत के उपप्रधानमंत्री बने।
यह उपलब्धि आज भी किसी अन्य हरियाणा के नेता के नाम नहीं है। चौधरी देवीलाल की राजनीतिक स्वीकार्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह सिरसा, फतेहाबाद, महम, भट्टू और रोड़ी जैसे 5 अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों से 8 बार विधायक चुने गए।
सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बने चौ. बंसीलाल
हरियाणा की राजनीति में चौधरी बंसीलाल का नाम विकास, प्रशासनिक क्षमता और मजबूत नेतृत्व के लिए जाना जाता है। उन्होंने वर्ष 1968 में मात्र 41 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया, जी आज भी कायम है।
यह तोशाम विधानसभा क्षेत्र से 6 बार और भिवानी से एक बार विधायक चुने गए। मुख्यमंत्री के अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में रेल मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व भी संभाला। चौधरी बंसीलाल कुल 4 बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। नसबंदी और शराबबंदी के कारण चौ. बंसीलाल चर्चाओं में आए और इस वजह से उन्हें सियासी रूप से नुकसान भी उठाना पड़ा।
3 अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों से सांसद रहे चौ. भजनलाल हरियाणा के तीसरे 'लाल' चौधरी भजनलाल ने हरियाणा की राजनीति में जनाधार और संगठन क्षमता के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। उनके नाम प्रदेश में एक ही विधानसभा क्षेत्र से सबसे अधिक 9 बार विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड दर्ज है।
उन्होंने पहली बार 1968 में आदमपुर से जीत हासिल की और इसके बाद 1972, 1977, 1982, 1991, 1996, 2000, 2005 और 2008 में लगातार जनता का विश्वास जीतते रहे। यह रिकॉर्ड आज भी हरियाणा की राजनीति में विशेष महत्व रखता है। चौधरी भजनलाल 3 बार मुख्यमंत्री बने और उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। वह फरीदाबाद, करनाल और हिसार-3 अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों से सांसद चुने गए तथा राज्यसभा के सदस्य रहने के अलावा केंद्र में मंत्री भी रहे।
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