Edited By Manisha rana, Updated: 14 May, 2026 09:34 AM

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए ठोस और दूरगामी कदम उठा रही है।
चंडीगढ़ : हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए ठोस और दूरगामी कदम उठा रही है। इस पहल का उद्देश्य न केवल किसानों की आय में वृद्धि करना है, बल्कि भूमि की उर्वरता को बनाए रखते हुए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को भी कम करना है।
उन्होंने बताया कि बदलते समय में उपभोक्ता भी स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हरियाणा सरकार किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित कर रही है ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर बाजार मूल्य मिल सके। उन्होंने जानकारी दी कि जो किसान प्राकृतिक या जैविक खेती अपनाएंगे, उन्हें अगले 5 वर्षों तक प्रति एकड़ प्रति वर्ष 10,000 रुपए का अनुदान दिया जाएगा। हालांकि इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपनी उपज का प्रमाणन पहले से ही एग्रीकल्चरल एंड प्रोसैस्ड फूड प्रोडक्टस एक्सपोर्ट डिवैल्पमैंट अथॉरिटी (एपीडा) से करवाना अनिवार्य होगा जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
राणा ने बताया कि राज्य में कृषि विभाग के स्वामित्व वाली लगभग 800 एकड़ भूमि को भी इस योजना के तहत उपयोग में लाया जाएगा। यह भूमि केवल उन्हीं किसानों को पट्टे पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 वर्षों तक उस पर प्राकृतिक या जैविक खेती करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे। इस कदम से दीर्घकालिक रूप से जैविक खेती का एक मजबूत आधार तैयार होगा और किसानों को स्थायी लाभ मिलेगा। कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि किसानों को प्रमाणन प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए राज्य स्तर पर ही एक अधिकृत संस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों-पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल में प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों में विशेष स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा।
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