वाहन प्रदूषण की जांच के लिए जांच केंद्रों ने जारी किए लाइसैंस

Edited By Isha, Updated: 11 Nov, 2019 12:36 PM

pollution check centers issued check vehicle pollution

वाहनों से पैदा होने वाले प्रदूषण की जांच करने वाले प्रदूषण जांच सैंटरों को खुद जांच की जरूरत है। प्रदूषण को लेकर वाहनों की जांच करने वाले ज्यादातर प्रदूषण जांच केंद्र फीस लेकर वाहन को पी.यू.सी....

जींद (स.ह.) : वाहनों से पैदा होने वाले प्रदूषण की जांच करने वाले प्रदूषण जांच सैंटरों को खुद जांच की जरूरत है। प्रदूषण को लेकर वाहनों की जांच करने वाले ज्यादातर प्रदूषण जांच केंद्र फीस लेकर वाहन को पी.यू.सी. (पाल्यूशन अंडर कंट्रोल) का सर्टीफिकेट जारी कर देते हैं। वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों पर जांच के लिए आने वाले वाहनों में कितने जांच में खरे उतरे और कितने फेल हुए, इस बारे परिवहन विभाग के पास कोई जानकारी नहीं होती। ऐसी जानकारी इन सैंटरों द्वारा परिवहन विभाग को मुहैया नहीं करवाई जा रही।

अब वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों पर नकेल कसने और उन्हें ज्यादा उत्तरदायी बनाने के लिए इन्हें ऑनलाइन किया जा रहा है। यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। परिवहन विभाग वाहनों के प्रदूषण की जांच के लिए प्रदूषण जांच केंद्रों को अपनी तरफ से मान्यता और लाइसैंस जारी करता है। विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त वाहन प्रदूषण जांच केंद्र द्वारा जारी पी.यू.सी. को ही जांच के दौरान मान्य समझा जाता है। वाहनों की प्रदूषण संबंधी जांच अनिवार्य है।

जिले में परिवहन विभाग ने 32 वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों को मान्यता दी हुई है। इन वाहन प्रदूषण जांच कें द्रों पर ही वाहनों की प्रदूषण को लेकर जांच होती है। इन जांच केंद्रों से जिन वाहनों को पी.यू.सी. मिल जाता है, वही सड़कों पर चलाए जा सकते हैं। वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों पर हो यह रहा है कि वाहन की जांच के नाम पर उसके साइलैंसर में एक नाली लगा दी जाती है और फिर वाहन की नंबर प्लेट की फोटो कैमरे से लेकर पी.यू.सी. जारी कर दिया जाता है। कायदा यह है कि वाहन की पी.यू.सी. को लेकर जांच में उसके चालक को वाहन का एक्सीलेटर दबाने के लिए कहा जाए और तब जो धुआं वाहन से निकले, उसमें कार्बन डाईआक्साईड की मात्रा की जांच हो।

हो यह रहा है कि वाहन का एक्सीलेटर दबवाए बिना ही फीस लेकर पी.यू.सी. जारी किए जा रहे हैं।  वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों पर जिस तरह से वाहनों की प्रदूषण को लेकर जांच हो रही है, उसे देखते हुए खुद वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों की जांच की सख्त जरूरत है। ऐसे वाहन, जिनमें आटो और बाइक तथा पुराने स्कूटरों की संख्या सबसे ज्यादा है, सड़कों पर धुएं का गुबार अपने पीछे उड़ाते हुए नजर आ रहे है, जिनके पास पी.यू.सी. भी होता है।

इससे साफ है कि वाहन की प्रदूषण को लेकर जांच के दौरान या तो जांच सही तरीके से नहीं की जाती या फिर वाहन के निर्धारित मात्रा से ज्यादा प्रदूषण देने के बावजूद उसे पी.यू.सी. जारी कर दिया जाता है। जो परिवहन विभाग वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों को मान्यता देता है, उसी परिवहन विभाग के पास पी.यू.सी. टैस्ट में फेल होने वाले वाहनों की कोई जानकारी नहीं है। इसे लेकर जींद में आर.टी.ए. सचिव कार्यालय से संपर्क साधा गया तो विभाग के लोगों का कहना था कि विभाग को ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई जाती। 
 

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