कलयुग की 'श्रवण कुमार': सास को सिर पर बिठा हरियाणा की बेटी ने पूरी की 84 कोस की परिक्रमा, बोलीं- मुझे बेटी की तरह पाला...

Edited By Isha, Updated: 03 Jun, 2026 01:34 PM

placing her mother in law upon her head daughter of haryana completed parikrama

सोशल मीडिया और आधुनिकता की चकाचौंध के बीच आस्था और सेवा की एक ऐसी अनोखी मिसाल सामने आई है, जिसने कलयुग में 'श्रवण कुमार' की याद ताजा कर दी है। हरियाणा की बेटी और राजस्थान की बहू

डेस्क: सोशल मीडिया और आधुनिकता की चकाचौंध के बीच आस्था और सेवा की एक ऐसी अनोखी मिसाल सामने आई है, जिसने कलयुग में 'श्रवण कुमार' की याद ताजा कर दी है। हरियाणा की बेटी और राजस्थान की बहू ने अपनी 90 वर्षीय बुजुर्ग सास को लोहे के टब में बिठाकर, उसे अपने सिर पर उठाकर ब्रज मंडल की दुर्गम 84 कोस की परिक्रमा पूरी की है। श्रद्धा और अटूट सेवा भाव के इस अनूठे दृश्य को जिसने भी देखा, वह दंग रह गया।

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टब को बनाया पालकी, सिर पर ढोई 'ममता'
बुजुर्ग सास की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बहू ने किसी गाड़ी या व्हीलचेयर का सहारा लेने के बजाय एक अनोखा रास्ता चुना।बहू ने एक बड़ा और मजबूत लोहे का टब लिया, जिसमें नीचे गद्देदार कपड़ा बिछाकर सास को आराम से बिठाया। तपती धूप और कंकड़-पत्थरों से भरी ब्रज की डगर पर बहू ने उस भारी-भरकम टब को अपने सिर पर उठाया और कदम-कदम आगे बढ़ती रही। कई दिनों की इस बेहद कठिन और थका देने वाली यात्रा को बहू ने चेहरे पर बिना किसी शिकन के, केवल भगवान कृष्ण के भजनों और सास के आशीर्वाद के सहारे पूरा कर लिया।

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सास ने मुझे बेटी की तरह पाला, अब मेरा कर्ज चुकाने का समय'
इस कठिन सफर के बीच जब भावुक काजल चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने बड़े ही सादगी भरे शब्दों में कहा कि मेरी सास बरसों से चलने-फिरने में असमर्थ हैं, लेकिन उनके दिल में कान्हा की ब्रजभूमि की परिक्रमा करने की तड़प थी। आज मैं जीवन में जो कुछ भी हूँ, जिस मुकाम पर हूँ, वह सब इन्हीं के आशीर्वाद की बदौलत है। इन्होंने मुझे हमेशा बहू नहीं, बल्कि अपनी सगी बेटी की तरह लाड-प्यार दिया है। जब इन्होंने मां का फर्ज निभाया, तो आज बेटी बनकर उनकी इच्छा पूरी करना मेरा पहला कर्तव्य है।
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ब्रजवासियों और श्रद्धालुओं का रिएक्शन
 परिक्रमा मार्ग में मौजूद स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने जब इस दृश्य को देखा, तो हर कोई भावुक हो उठा। लोगों ने इस बहू का जगह-जगह स्वागत किया और पैर छूकर आशीर्वाद लिया। संतों का कहना है कि आज के दौर में जहाँ बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम भेज दिया जाता है, वहाँ इस बहू ने मातृ-सेवा की एक अमर मिसाल पेश की है।

 

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