Edited By Manisha rana, Updated: 03 Jun, 2026 03:15 PM

कहानी है करनाल जिले के बराना गाँव के निर्मल सिंह की जिन्हें विरासत में 3 गायें मिली थीं, आज 150 का 'वीआईपी' कुनबा है। 10 साल तक हरियाणा पुलिस में सेवाएं प्रदान करने के बाद निर्मल सिंह ने पुलिस की नौकरी छोड़कर डेयरी फार्मिंग की कमान थाम ली।
करनाल : कहानी है करनाल जिले के बराना गाँव के निर्मल सिंह की जिन्हें विरासत में 3 गायें मिली थीं, आज 150 का 'वीआईपी' कुनबा है। 10 साल तक हरियाणा पुलिस में सेवाएं प्रदान करने के बाद निर्मल सिंह ने पुलिस की नौकरी छोड़कर डेयरी फार्मिंग की कमान थाम ली। निर्मल सिंह युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनकर सामने आया है, जो लोग खेती और पशुपालन को छोटा या घाटे का सौदा समझते हैं।
बता दें कि निर्मल सिंह के घर में दादा-परदादा के जमाने से पारंपरिक तौर पर 3-4 गायें बंधी रहती थीं, लेकिन निर्मल इन्हें सिर्फ 'घर के खर्च का जरिया' नहीं बनाना चाहते थे। वे इसे एक आधुनिक उद्योग के रूप में देखना चाहते थे। आज उनके बराना गाँव वाले फार्म पर जाएँ, तो नजारा किसी फाइव-स्टार रिसॉर्ट जैसा दिखता है। वहाँ छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 150 गायें हैं, जिन्हें बकायदा उनकी उम्र और कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग आलीशान शेड्स में रखा गया है। निर्मल का लक्ष्य साल 2030 तक इस कुनबे को 400 गायों तक पहुँचाने का है।
विदेश से भी रखी जाती है निगरानी
निर्मल ने अपनी हर गाय के गले में एक विशेष इजरायली स्मार्ट कॉलर टैग बांधा हुआ है। यह टैग सीधे निर्मल के मोबाइल ऐप से जुड़ा है। यह स्मार्ट टैग चौबीसों घंटे मॉनिटर करता है कि गाय कितनी बार उठी-बैठी, उसने कितना चारा खाया और कितना पानी पिया। अगर निर्मल डेयरी बिजनेस के सिलसिले में विदेश दौरे पर भी हों, तो भी वे सात समंदर पार बैठकर अपने फोन पर देख सकते हैं कि कौन सी गाय अस्वस्थ महसूस कर रही है। गाय के बीमार होने के शारीरिक लक्षण दिखने से पहले ही, यह ऐप निर्मल को 'अलर्ट' भेज देता है।
फार्म पर निगरानी के लिए 2 डॉक्टर- 8 केयरटेकर रहते हैं तैनात
निर्मल के फार्म पर गायों को बेहद लाड़-प्यार और वैज्ञानिक तरीके से पाला जाता है। चिलचिलाती गर्मी में गायों का दूध कम न हो, इसके लिए शेड में विशालकाय पंखे और फॉगर्स (फुव्वारे) लगाए गए हैं, जो वातावरण को ठंडा रखते हैं। यहाँ दूध निकालने के लिए इंसानी हाथों का इस्तेमाल नहीं होता। दिन में तीन बार पूरी तरह से आधुनिक स्वचालित मशीनों द्वारा दूध निकाला जाता है, जिससे दूध में 100% शुद्धता और स्वच्छता बनी रहती है। फार्म पर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए 2 डॉक्टर और 8 केयरटेकर तैनात रहते हैं।
एक दिन में ₹1,15,000 का दूध बेचने का रिकॉर्ड
शुरुआत में जिस काम को छोटे स्तर से शुरू किया था, आज वह एक बड़े कॉर्पोरेट घराने में बदल चुका है। आज इस फार्म पर रोज़ाना करीब 1850 लीटर दूध पैदा हो रहा है। (एक दिन का ऑल-टाइम रिकॉर्ड 2400 लीटर का है)। निर्मल आज हर दिन ₹80,000 से ₹90,000 का दूध बेच रहे हैं। उनके नाम एक दिन में अधिकतम ₹1,15,000 का दूध बेचने का भी रिकॉर्ड है। इनका दूध किसी बिचौलिए के पास नहीं जाता। इसका एक बड़ा हिस्सा सीधे एफएमसीजी की दिग्गज कंपनी 'नेस्ले' खरीदती है। इसके अलावा, कुरुक्षेत्र और करनाल के बाजारों में इनका दूध और खुद का बनाया शुद्ध देसी घी हाथों-हाथ बिकता है।
67 लीटर का चमत्कार और एक ग्लोबल सपना
निर्मल के फार्म पर मुख्य रूप से एचएफ नस्ल की गायें हैं। अमूमन यहाँ हर गाय 40 लीटर से ज्यादा दूध देती है, लेकिन उनके पास एक ऐसी 'सुपर काउ' भी है जिसने एक दिन में रिकॉर्ड 67 लीटर दूध देकर इतिहास रच दिया था। निर्मल सिंह अब सिर्फ दूध बेचने वाले डेयरी फार्मर नहीं रहे। वे एक एग्री-प्रेन्योर बन चुके हैं। वे कई देशों का दौरा कर चुके हैं ताकि दुनिया की सबसे बेहतरीन सीमेन और ब्रीड इम्प्रूवमेंट (नस्ल सुधार) तकनीक को हरियाणा के इस छोटे से गाँव में ला सकें।
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