Edited By Isha, Updated: 09 Jun, 2026 09:08 AM

हरियाणा IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 661 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की जांच में CBI अब बड़ा कदम उठाने जा रही है।
डेस्क: हरियाणा IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 661 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की जांच में CBI अब बड़ा कदम उठाने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी हरियाणा कैडर के एक IAS अधिकारी को सरकारी गवाह बनाने की सोच रही है। खबरों की माने तो माना जा रहा है कि इस अधिकारी के बयान से पूरे नेटवर्क और घोटाले की कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
CBI ने शनिवार को इस मामले में पहली बार हरियाणा-चंडीगढ़ से बाहर कार्रवाई करते हुए दिल्ली-NCR तक जांच का दायरा बढ़ाया। एजेंसी ने चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-NCR में हरियाणा कैडर के तीन IAS अधिकारियों और एक IFS अधिकारी के आवास समेत छह ठिकानों पर छापेमारी की।
जांच एजेंसी का मानना है कि सरकारी विभागों के बैंक खाते खुलवाने, फर्जी FDR तैयार करने और सरकारी धन को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में कुछ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में एक IAS अधिकारी को सरकारी गवाह बनाए जाने से जांच को मजबूत आधार मिल सकता है और अन्य आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में मदद मिल सकती है। संबंधित अधिकारी से पहले भी पूछताछ हो चुकी है और उसके पास जो जानकारियाँ है वो काफी हद तक केस में मदद कर सकती है।
दो एजेंसियां की जांच
मामले की जांच फिलहाल CBI और ED दोनों कर रहे हैं। CBI पहले ही 13 लोगों और दो फर्जी संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। जांच के दायरे में आए अधिकारियों में मोहम्मद शाइन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा, संकेत कुमार और डॉ. वैभव शर्मा के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।