हरियाणा में शिक्षा, कौशल और उद्योग को जोड़ने की नई पहल, रोजगार देने वाली कंपनियों को मिलेगा विशेष इंसेंटिव

Edited By Krishan Rana, Updated: 08 Jul, 2026 02:50 PM

haryana launches new initiative to integrate education skills and industry spe

हरियाणा सरकार ने रोजगार, कौशल विकास और औद्योगिक निवेश को एकीकृत करने की दिशा में

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा सरकार ने रोजगार, कौशल विकास और औद्योगिक निवेश को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। नई व्यवस्था के तहत उद्योग जगत अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं के लिए तैयार किए जाने वाले तकनीकी पाठ्यक्रमों के निर्धारण में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा।

सरकार और उद्योगों के बीच हुए समझौते (एमओयू) के अनुसार उद्योग अपनी जरूरत के अनुरूप नए पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दे सकेंगे, जिन्हें आईटीआई और अन्य तकनीकी संस्थानों में लागू किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा और उद्योग के बीच लंबे समय से बना कौशल अंतर (स्किल गैप) कम होगा तथा युवाओं को ऐसी प्रशिक्षण व्यवस्था मिलेगी, जो सीधे रोजगार से जुड़ी होगी। इससे हरियाणा के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा और उद्योगों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा।

स्थानीय युवाओं की भर्ती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि में भी बड़ा इजाफा किया है। अब किसी उद्योग द्वारा हरियाणा के युवा को नौकरी देने पर प्रति कर्मचारी एक लाख रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा। वहीं दिव्यांग युवाओं को रोजगार देने पर यह राशि 1.25 लाख रुपये होगी। इससे पहले यह सहायता केवल 48 हजार रुपये प्रति कर्मचारी थी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार सरकार कौशल विकास के साथ-साथ एमएसएमई और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूत बनाने पर विशेष जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से कॉलेजों, आईटीआई और विश्वविद्यालयों में अनुसंधान, नवाचार तथा नए ब्रांड विकसित करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए 20 करोड़ रुपये का विशेष बजट निर्धारित किया गया है। सरकार चाहती है कि युवा केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं उद्यम स्थापित कर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करें।

हरियाणा में स्टार्टअप को मिल रही नई उड़ान
हरियाणा में अब तक करीब एक लाख युवाओं ने स्टार्टअप के लिए पंजीकरण कराया है, जिनमें से लगभग 9,500 स्टार्टअप सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत इस क्षेत्र में सबसे आगे हैं। राज्य सरकार उद्योगों और स्टार्टअप के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि शिक्षा, उद्योग और रोजगार के बीच ऐसा स्थायी तंत्र विकसित करना है, जिससे उद्योगों को दक्ष मानव संसाधन मिले, युवाओं को अपने ही राज्य में बेहतर रोजगार उपलब्ध हों और एमएसएमई व स्टार्टअप के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों का तेजी से विस्तार हो। यदि यह मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है तो हरियाणा कौशल आधारित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में देश के लिए एक मिसाल बन सकता है।


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