कैट ने हरियाणा स्थित लेखा भवन के अकाऊंटैंट आफिस के बर्खास्तगी आदेश किए रद्द, जानिए क्या है वजह

Edited By Isha, Updated: 03 Oct, 2026 02:17 PM

cat quashes dismissal orders of an accountant from the haryana based accounts of

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने हरियाणा स्थित लेखा भवन के अकाउंटेंट कार्यालय में तैनात सुनील कुमार को बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने सुनील कुमार की बर्खास्तगी के आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है

चंडीगढ़: केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने हरियाणा स्थित लेखा भवन के अकाउंटेंट कार्यालय में तैनात सुनील कुमार को बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने सुनील कुमार की बर्खास्तगी के आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी को बिना नियमित जांच के उसकी सेवा से बर्खास्त करना पूरी तरह से गलत और कानून के विरुद्ध है।

क्या था पूरा मामला?
वर्ष 2015 में कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से सुनील कुमार की नियुक्ति डेटा एंट्री ऑपरेटर  के पद पर हुई थी। लेखा भवन के वरिष्ठ उप महालेखाकार (प्रशासन) उनके नियुक्ति प्राधिकारी थे। उनकी नियुक्ति में दो साल की परिवीक्षा अवधि शामिल थी, जो 19 अगस्त 2017 को सफलतापूर्वक पूरी हो गई थी। प्रतिवादियों (विभाग) की ओर से उनकी परिवीक्षा अवधि बढ़ाने का कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया था और उनका सेवा रिकॉर्ड भी संतोषजनक रहा था। इसके बावजूद, लेखा भवन, चंडीगढ़ के उप महालेखाकार (प्रशासन) ने 28 सितंबर 2018 को बिना कोई सुनवाई का अवसर दिए और बिना किसी नियमित जांच के उन्हें बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया था।

एसएससी और सीएफएसएल रिपोर्ट का दिया गया था हवाला
विभाग ने बर्खास्तगी के आदेश को उचित ठहराते हुए तर्क दिया था कि एसएससी से प्राप्त अभिलेखों में लिखित परीक्षा में उपस्थित व्यक्ति की तस्वीर और लिखावट में विसंगतियां पाई गई थीं। मामले को केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला , चंडीगढ़ को सौंपा गया था, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर दावा किया गया कि आवेदक की तस्वीरें, हस्ताक्षर और लिखावट मेल नहीं खाते हैं।दूसरी ओर, वकील के.बी. शर्मा के माध्यम से ट्रिब्यूनल में चुनौती देते हुए सुनील कुमार के पक्ष में दलील दी गई कि उनके द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज और प्रमाण पत्र पूरी तरह असली थे। उन्होंने चयन प्रक्रिया में स्वयं भाग लिया था और सभी फॉर्म व दस्तावेज खुद भरे थे।

ट्रिब्यूनल की कड़ी टिप्पणी
मामले  की सुनवाई के बाद CAT ने पाया कि विभाग ने कोई भी नियमित जांच नहीं की, जिसमें प्रतिवादियों द्वारा प्रस्तुत सामग्री की आवेदक की उपस्थिति में निष्पक्ष जांच हो सके। इस प्रकार, आवेदक को यह साबित करने का कोई भी सार्थक अवसर नहीं मिला कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप या निष्कर्ष गलत हैं। ट्रिब्यूनल के इस ऐतिहासिक फैसले से सरकारी महकमों में बिना प्रक्रिया के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने वालों को बड़ा झटका लगा है।

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