NCR की 25 हजार किमी सड़कों पर धूल का हिसाब-किताब शुरू, फोटो-वीडियो और मौके के सत्यापन से परखी जाएगी स्थिति

Edited By Krishan Rana, Updated: 21 Sep, 2026 07:17 PM

assessment of dust levels on 25 000 km of roads in the ncr has begun the situat

सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने से पहले केंद्र सरकार ने सड़क से उठने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए व्यापक

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने से पहले केंद्र सरकार ने सड़क से उठने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR क्षेत्र में आने वाले 9 प्रमुख शहरों की कुल 25,278 किलोमीटर सड़कों को निगरानी के दायरे में लिया गया है। इनमें से 5,928 किलोमीटर सड़कें मरम्मत के लिए चिन्हित की गई हैं।

केंद्र की नई कार्ययोजना में खास बात यह है कि अब सड़क की मरम्मत पूरी होने की रिपोर्ट भर देना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित एजेंसियों को फोटो और वीडियो के माध्यम से काम का दस्तावेजीकरण करना होगा। अधिकारियों को मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन और मैनुअल निरीक्षण भी करना होगा। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सड़क की स्थिति सुधरने के बाद उससे उठने वाली धूल में वास्तविक रूप से कितनी कमी आई।

दिल्ली से भिवाड़ी तक एक ही धूल नियंत्रण रणनीति
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से NCR के 9 शहरों में वायु प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों की समीक्षा की गई है। इनमें दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, सोनीपत, नीमराना और भिवाड़ी शामिल हैं। 18 अगस्त को हुई समीक्षा बैठक में सड़क मरम्मत के साथ रोड डस्ट, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, निर्माण एवं विध्वंस मलबे, हरियाली और वायु गुणवत्ता को एक साथ लेकर कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
इसका उद्देश्य एनसीआर को अलग-अलग शहरों की समस्या के बजाय एक साझा प्रदूषण क्षेत्र के रूप में देखते हुए धूल नियंत्रण के उपायों को लागू करना है।

5,928 किमी में 1,468 किमी काम पूरा
NCR के सड़क नेटवर्क में 5,928 किलोमीटर हिस्से को मरम्मत के लिए चिन्हित किया गया है। चालू वर्ष में इनमें से 4,770 किलोमीटर सड़क की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 1,468 किलोमीटर सड़क पर काम पूरा होने की रिपोर्ट केंद्र को मिली है।
हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में गुरुग्राम की 727 किलोमीटर, फरीदाबाद की 438 किलोमीटर और सोनीपत की 210 किलोमीटर सड़कें व्यापक मरम्मत अथवा पुनर्विकास के लिए चिन्हित की गई हैं।
उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद की 463 किलोमीटर, नोएडा की 176 किलोमीटर और ग्रेटर नोएडा की 263 किलोमीटर सड़कें सूची में हैं। राजस्थान के नीमराना में 33 किलोमीटर और भिवाड़ी में 80 किलोमीटर सड़कें भी इस योजना का हिस्सा हैं।

गुरुग्राम में 266 किमी, फरीदाबाद में 174 किमी सड़क सुधरी
चालू वर्ष की योजना में गुरुग्राम की 495 किलोमीटर सड़कें शामिल की गई थीं। इनमें 422 किलोमीटर के लिए कार्यादेश जारी हो चुके हैं और 266 किलोमीटर का काम पूरा होने की रिपोर्ट है।
फरीदाबाद में 274 किलोमीटर सड़कें योजना में थीं और पूरे हिस्से के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। इनमें 174 किलोमीटर पर काम पूरा बताया गया है। सोनीपत में 124 किलोमीटर सड़कें चालू वर्ष की योजना में शामिल थीं। इनमें 73 किलोमीटर की मरम्मत पूरी हो चुकी है, जबकि अतिरिक्त 40 किलोमीटर के काम के लिए ठेका दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 163 किलोमीटर, नोएडा में 176 किलोमीटर और ग्रेटर नोएडा में 263 किलोमीटर सड़कें चालू वर्ष की योजना में शामिल थीं। इनमें क्रमश: 37, 63 और 57 किलोमीटर का काम पूरा होने की रिपोर्ट है।
राजस्थान के नीमराना में 33 में से 3 किलोमीटर और भिवाड़ी में 80 में से 25 किलोमीटर सड़क की मरम्मत पूरी बताई गई है।

अब सड़क बनने से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा धूल कम होना
केंद्र की कार्ययोजना में सबसे बड़ा बदलाव परिणाम आधारित निगरानी का है। पहले उन सड़कों की पहचान की जाएगी जो धूल प्रदूषण में अधिक योगदान कर रही हैं। इसके बाद उन्हें प्राथमिकता के आधार पर वर्गीकृत कर मरम्मत और अन्य उपाय किए जाएंगे।
नगर निकायों को मरम्मत कार्य की फोटो और वीडियो सहित रिकॉर्ड तैयार करना होगा। अधिकारियों को मौके पर जाकर यह सत्यापित करना होगा कि काम वास्तव में हुआ है या नहीं।
30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर मरम्मत से पहले और बाद में कम लागत वाले पोर्टेबल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग उपकरणों से निगरानी की दिशा में भी निर्देश दिए गए हैं। इससे सड़क की स्थिति में बदलाव के साथ धूल और वायु गुणवत्ता पर उसके प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

रोड स्वीपिंग मशीनों की संख्या बढ़ाने पर जोर
सड़क की धूल नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई है। दिल्ली में बड़ी श्रेणी की 125 मशीनों की जरूरत के मुकाबले 89 मशीनें तैनात हैं। मध्यम श्रेणी की 46 मशीनों की जरूरत है, जबकि अभी चार उपलब्ध हैं। 70 मशीनों का ठेका अंतिम हो चुका है और अक्टूबर के अंत तक उनकी तैनाती का लक्ष्य रखा गया है।

गुरुग्राम में 30 बड़ी मशीनों में 20 तैनात हैं, जबकि चार मध्यम मशीनों की जरूरत के बावजूद अभी कोई उपलब्ध नहीं है। फरीदाबाद में 20 बड़ी मशीनों में 14 काम कर रही हैं।
गाजियाबाद में 12 बड़ी और 17 मध्यम मशीनों की जरूरत के मुकाबले पांच बड़ी और आठ मध्यम मशीनें तैनात हैं। ग्रेटर नोएडा में 28 बड़ी और छह मध्यम मशीनों की जरूरत के मुकाबले 10 बड़ी मशीनें उपलब्ध हैं। नोएडा में बड़ी मशीनों की आवश्यकता पूरी बताई गई है।
छोटे सेक्टर मार्गों पर नियमित हाथ से सफाई और महीने में दो बार गहरी सफाई की व्यवस्था भी की जा रही है। केंद्र का जोर मशीनों की संख्या के बजाय सड़क की वास्तविक सफाई और धूल में कमी पर है।

सड़क की धूल के साथ निर्माण मलबे पर भी नजर
NCR में निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले मलबे को भी प्रदूषण नियंत्रण की योजना से जोड़ा गया है। दिल्ली में चार संयंत्रों की कुल क्षमता करीब 5,000 टन प्रतिदिन है, जबकि मलबे का उत्पादन लगभग 6,000 टन प्रतिदिन बताया गया है। ओखला में 1,000 टन प्रतिदिन क्षमता वाले नए संयंत्र की प्रक्रिया चल रही है।

गुरुग्राम में 1,500 टन प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र अनुमानित मलबे के बराबर क्षमता वाला है। फरीदाबाद में 500 टन प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र प्रस्तावित है। गाजियाबाद में 400 टन प्रतिदिन क्षमता वाले संयंत्र की मशीनरी लग चुकी है। हालांकि धूल नियंत्रण के लिए 25 फुट ऊंची चारदीवारी का काम अभी पूरा होना बाकी है।

बिटुमिन की कमी होने पर वैकल्पिक इंतजाम
बैठक में सड़क मरम्मत के दौरान बिटुमिन की उपलब्धता में संभावित दिक्कतों पर भी चर्चा की गई। इसके लिए आकस्मिक सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। जहां तत्काल सड़क मरम्मत संभव नहीं होगी, वहां हरियाली बढ़ाने और पानी के छिड़काव जैसे अस्थायी उपाय अपनाए जाएंगे, ताकि संबंधित सड़क धूल का बड़ा स्रोत न बने।
इससे साफ है कि सर्दियों से पहले हर सड़क की मरम्मत पूरी करना ही अभियान का एकमात्र लक्ष्य नहीं है। जहां मरम्मत में समय लगेगा, वहां भी धूल को नियंत्रित रखने के वैकल्पिक उपाय लागू करने की तैयारी है।

आंकड़ों में NCR की तैयारी
25,278 किमी — नौ एनसीआर शहरों का कुल सड़क नेटवर्क
5,928 किमी — मरम्मत के लिए चिन्हित सड़कें
4,770 किमी — चालू वर्ष का मरम्मत लक्ष्य
1,468 किमी — अब तक पूरा काम
9 शहर — दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, सोनीपत, नीमराना और भिवाड़ी

हरियाणा के NCR की स्थिति
गुरुग्राम: 727 किमी सड़कें चिन्हित, चालू वर्ष में 495 किमी; 266 किमी काम पूरा।
फरीदाबाद: 438 किमी सड़कें चिन्हित, चालू वर्ष में 274 किमी; 174 किमी काम पूरा।
सोनीपत: 210 किमी सड़कें चिन्हित, चालू वर्ष में 124 किमी; 73 किमी काम पूरा।

केंद्र की इस कवायद से सड़क निर्माण और मरम्मत को सीधे वायु प्रदूषण नियंत्रण से जोड़ने की दिशा में जोर बढ़ा है। अब आने वाले महीनों में सड़क की मरम्मत की प्रगति के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इन उपायों का सड़क से उठने वाली धूल और स्थानीय वायु गुणवत्ता पर वास्तविक असर कितना दिखाई देता है।

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