रेणु भाटिया का एक बयान...और माफी की मांग पर अड़ा पूरा नर्सिंग स्टाफ, पेन डाउन कर दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

Edited By Krishan Rana, Updated: 08 Jun, 2026 03:17 PM

a statement by renu bhatia  and the entire nursing staff stands firm on the de

लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) सिविल अस्पताल में सोमवार को नर्सिंग ऑफिसर्स ने राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया की टिप्पणियों के

कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा): लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) सिविल अस्पताल में सोमवार को नर्सिंग ऑफिसर्स ने राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया की टिप्पणियों के विरोध में प्रदर्शन किया और दो घंटे का पेन डाउन कर रोष जताया। नर्सिंग स्टाफ ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान की गई टिप्पणियों से पूरे नर्सिंग कैडर की गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चेयरपर्सन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगतीं तो आंदोलन पूरे हरियाणा में फैलाया जाएगा।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब रविवार को एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले की जांच के लिए अस्पताल पहुंचीं रेणु भाटिया ने ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ और अधिकारियों से कड़े सवाल किए। उन्होंने एक नर्स से पूछा कि यदि उसकी अपनी बेटी होती तो क्या वह उसे 15 मिनट तक किसी पुरुष डॉक्टर के पास अकेला छोड़ती। इस टिप्पणी को लेकर नर्सिंग स्टाफ में भारी नाराजगी देखने को मिली।

नर्सों ने कहा- पूरे स्टाफ को कटघरे में खड़ा करना गलत
प्रदर्शन के दौरान नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि बिना किसी जांच के पूरे नर्सिंग स्टाफ पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उनका कहना था कि अस्पतालों में नर्सें दिन-रात मरीजों की सेवा करती हैं और हर स्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं, लेकिन अक्सर हर गलती का ठीकरा उनके सिर फोड़ दिया जाता है।

सीनियर नर्सिंग ऑफिसर गुरमीत कौर प्रदर्शन के दौरान भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि कई बार एक नर्सिंग ऑफिसर को 70 से 80 मरीजों तक की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, इसके बावजूद उनके समर्पण और मेहनत को नजरअंदाज कर आरोप लगाए जाते हैं।

अस्पताल परिसर में नारेबाजी, सीएमओ को सौंपा ज्ञापन
सोमवार सुबह नर्सिंग स्टाफ अस्पताल परिसर में एकत्र हुआ और चेयरपर्सन के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह को ज्ञापन सौंपकर रेणु भाटिया से सार्वजनिक माफी की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा।

स्थिति को शांत करने के लिए प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर (पीएमओ) डॉ. साराह अग्रवाल और सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह स्वयं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ को आश्वासन दिया कि उनकी भावनाओं और मांगों से महिला आयोग चेयरपर्सन को अवगत कराया जाएगा। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।

निरीक्षण के दौरान उठाए थे कई सवाल
रेणु भाटिया ने अस्पताल निरीक्षण के दौरान पीड़िता को लंबे समय तक अकेला छोड़े जाने, महिला स्टाफ की अनुपस्थिति और आरोपी डॉक्टर की गतिविधियों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी पूछा था कि आरोपी डॉक्टर ने किशोरी को 100 रुपये क्यों दिए और उसके माता-पिता के बारे में जानकारी क्यों ली।

उन्होंने अस्पताल प्रशासन से यह भी जवाब मांगा कि जब किशोरी ने एक महिला मरीज को डॉक्टर की हरकतों की जानकारी दी थी और मरीज ने इसकी सूचना स्टाफ को दे दी थी, तब भी आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब ओपीडी में तीन नर्सों की ड्यूटी थी तो पीड़िता अकेली कैसे रह गई।

आरोपी डॉक्टर की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
महिला आयोग चेयरपर्सन ने आरोपी डॉक्टर की दोबारा नियुक्ति को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि डॉक्टर की नियुक्ति किसकी सिफारिश पर की गई और किन परिस्थितियों में अस्पताल को उसकी आवश्यकता बताई गई। इस पर अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टर की नियुक्ति वर्ष 2021-22 में की गई थी।

जानें क्या था मामला
जानकारी के अनुसार 29 मई को एक 15 वर्षीय किशोरी अपने पिता के साथ अस्पताल आई थी। उसके पिता भर्ती थे जबकि किशोरी ने पेट दर्द की शिकायत की थी। आरोप है कि इसी दौरान डॉक्टर शैली ने उसे ओपीडी में ले जाकर कई बार दुष्कर्म किया। बाद में तबीयत बिगड़ने पर किशोरी को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां उसने वरिष्ठ चिकित्सकों को पूरी घटना बताई।

मामले के सामने आने के बाद 31 मई को आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने उसकी सेवाएं समाप्त कर दीं और 1 जून को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जांच में आरोपी डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार करने की बात कही थी।

महिला आयोग चेयरपर्सन का रुख सख्त
उधर, रेणु भाटिया ने स्पष्ट किया है कि वह अपने बयान पर कायम हैं और माफी नहीं मांगेंगी। उनका कहना है कि मामले में गंभीर लापरवाही हुई है और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। वहीं नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि पूरे कैडर को संदेह के घेरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं है और उनकी गरिमा की रक्षा की जानी चाहिए। 

(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)               

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!