फटे जूतों से एशियाई खेलों के गोल्ड तक का सफर,मां ने घरों में काम कर उठाया खेल का खर्च... नेहा ने रचा संघर्ष का इतिहास

Edited By Isha, Updated: 03 Oct, 2026 09:36 AM

a journey from worn out shoes to asian games gold

सोनीपत की चार बेटियों ने एशियाई खेलों में भारत को हॉकी में गोल्ड मेडल दिलाने में अपना योगदान दिया है। नेहा गोयल, ज्योति रुमावत, साक्षी राणा और शिल्पी डबास भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं और चीन के खिलाफ स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में शामिल रहीं।...

सोनीपत(सुशील): सोनीपत की चार बेटियों ने एशियाई खेलों में भारत को हॉकी में गोल्ड मेडल दिलाने में अपना योगदान दिया है। नेहा गोयल, ज्योति रुमावत, साक्षी राणा और शिल्पी डबास भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं और चीन के खिलाफ स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में शामिल रहीं। इनमें नेहा गोयल का सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है। कभी फटे जूतों में करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर अभ्यास करने वाली नेहा ने मुश्किल हालात के बावजूद हॉकी नहीं छोड़ी। मां की मेहनत, कोच प्रीतम सिवाच का भरोसा और पति सुनील का साथ नेहा के सफर को मजबूती दी। एशियाई खेलों के लिए रवाना होने से पहले नेहा ने पति सुनील से सोना जीतने का वादा किया था और अब उन्होंने वह वादा पूरा कर दिया है।

कभी हॉकी स्टिक हाथ में थामना ही नेहा के लिए किसी सपने से कम नहीं था। उस उम्र में खेल से मिलने वाले अच्छे जूते और कपड़े ही उन्हें सबसे बड़ी खुशी देते थे। लेकिन नेहा की प्रतिभा को कोच प्रीतम सिवाच ने पहचान लिया और उन्हें प्रशिक्षण देना शुरू किया। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा सफर, जिसमें संघर्ष बहुत था, लेकिन नेहा के इरादे उससे भी मजबूत थे।नेहा की मां सावित्री ने बेटी को खिलाड़ी बनाने के लिए खुद कड़ी मेहनत की। वह दूसरों के घरों में काम करने के साथ कारखाने में भी काम करती थीं, ताकि बेटी के खेल का खर्च उठाया जा सके। आर्थिक हालात इतने मुश्किल थे कि नेहा को कई बार फटे जूतों में और खाली पेट अभ्यास करना पड़ा। अभ्यास के लिए वह रोजाना करीब 10 किलोमीटर तक पैदल जाती थीं। सुविधाएं कम थीं, लेकिन हॉकी के प्रति जुनून कभी कम नहीं हुआ।

 
नेहा की मेहनत को दिशा दी द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच प्रीतम सिवाच ने। उन्होंने न केवल नेहा की प्रतिभा को तराशा, बल्कि जरूरत के समय आर्थिक मदद भी की। प्रीतम सिवाच के मुताबिक नेहा बेहद मेहनती खिलाड़ी हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी।नेहा ने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया। रेलवे की ओर से वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलते हुए उन्होंने कई सफलताएं हासिल कीं। वर्ष 2018 के एशियाई खेलों में भी नेहा ने भारतीय महिला हॉकी टीम के फाइनल मुकाबले में गोल कर टीम की जीत की राह मजबूत की और भारत ने रजत पदक हासिल किया। इसके बाद वह टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहीं।

 
 नेहा के सफर में एक ऐसा मोड़ भी आया, जब उन्हें लगा कि उनका हॉकी करियर खत्म हो सकता है। वर्ष 2015 में पैर में चोट के बाद डॉक्टरों ने भविष्य में खेल जारी रखने को लेकर आशंका जताई थी। नेहा पूरी तरह टूट गई थीं। इसी मुश्किल समय में सुनील उनके साथ खड़े रहे। इलाज से लेकर भौतिक चिकित्सा तक उन्होंने हर कदम पर नेहा का साथ दिया। नेहा के पति सुनील ने बताया कि नेहा वायदा कर गई थी कि वह गोल्ड मेडल जीत कर आएंगे और उसने आज अपना वायदा पूरा कर दिया। 

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