अफसरों के साथ डेरे में ‘जांच’ करवाता रहा वांटेड

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Tuesday, September 12, 2017-12:00 AM

चंडीगढ़/सिरसा(अरुण): डेरा सच्चा सौदा में 3 दिन चले सर्च आप्रेशन के बाद एक ऐसा सच सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। यह सच 25 अगस्त को पंचकूला में हिंसा की साजिश रचने वालों से जुड़ा है। 

इन्हीं साजिशकत्र्ताओं में शामिल डेरे से जुड़े पी.आर. नैन पर आरोप है कि उसने हिंसा भड़काने के मकसद से 5 करोड़ रुपए पंचकूला में पहुंचे लोगों के भोजन व ट्रांसपोर्ट के लिए चमकौर सिंह को दिए थे। डी.जी.पी. बी.एस. संधू स्वयं खुलासा कर चुके हैं कि नैन व उसके अन्य सहयोगियों ने 5 करोड़ रुपए की मार्फत पंचकूला में हिंसा फैलाने की साजिश रची थी। 

उन्होंने नैन को वांटेड करार दिया था लेकिन पुलिस का यह कैसा तंत्र है कि डेरे में सॄचग के दौरान एक वांटेड ही पूरी टीम को उनकी मौजूदगी में लीड करता रहा? इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी तो कन्नी काटते नजर आए, मगर प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि नैन वांटेड है, के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। पुलिस ने नैन सहित कई लोगों के खिलाफ 5 करोड़ के ‘सुपारी केस’ में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। पंचकूला स्थित नामचर्चा घर के इंचार्ज चमकौर सिंह व दान सिंह इत्यादि को 2 दिन पूर्व गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन नैन अब तक गिरफ्त से बाहर है। 

2 दिन पूर्व भी आई थी पुलिस
पंचकूला पुलिस 2 दिन पूर्व सिरसा भी आई ताकि नैन को काबू किया जा सके लेकिन वह पुलिस की मौजूदगी में ही ‘गायब’ रहा। सूत्रों के अनुसार नैन सर्च आप्रेशन में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ डेरे में ही मौजूद रहा और मालूम यह भी हुआ है कि इसी शख्स ने डेरे के अन्य लोगों के साथ जांच वाले स्थानों के बारे में जानकारी दी। सवाल यह है कि डेरे में मौजूद होने के बावजूद आखिरकार पुलिस ने नैन को गिरफ्तार क्यों नहीं किया अथवा पंचकूला पुलिस के हाथ नैन क्यों नहीं आया? 

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