दीमक और वन माफिया चट कर रहे हरे-भरे पेड़

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Monday, December 11, 2017-11:59 AM

कालांवाली(श्रवण प्रजापति):वन विभाग द्वारा पेड़ लगाओ व स्वच्छ वातावरण रखने के लिए समय-समय  पर पौधारोपण अभियान भी चलाया जाता है लेकिन ये अभियान न जाने कब दम तोड़ जाते हैं और विभागीय अधिकारी कागजी कार्रवाई कर वाहवाही लूटते रहते हैं। क्षेत्र में पिछले काफी समय से सूखे पेड़ों पर वन माफिया की नजर टिकी हुई है और अंधेरे का फायदा उठाकर सूखे पेड़ों को धड़ाधड़ काटा जा रहा है परंतु वन सुरक्षा गार्ड हाथ मलते रह जाते हैं। नहर व सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ों का सबसे बड़ा कारण दीमक बना हुआ है। 

अनुमान के मुताबिक कालांवाली इलाके में भी लगभग 10 हजार पेड़ दीमक भी भेंट चढ़ चुके हैं। विभाग द्वारा इन सूखे पेड़ों की कटाई न करवाए जाने पर वन माफिया को खूब फायदा पहुंच रहा है। सड़कों व नहरों किनारे सैंकड़ों की संख्या में दीमक की चपेट में आए पेड़ सड़क किनारों व खेतों में गिरे देखे जा सकते हैं। टूटे सूखे पेड़ों पर वन माफिया दिन में नजर रखता है और रात के अंधेरे में विभाग को चुना लगा जाता है, जिस तेज रफ्तार से सड़कों किनारे सूखे पेड़ों की भेंट चढ़ रहे हैं, उतनी ही ढीली रफ्तार से विभाग नए पौधे लगाने व पेड़ों की सुरक्षा का काम कर रहा है। 

5 वर्ष से नहीं हुई पेड़ों की नम्बरिंग
विभाग द्वारा सूखे पेड़ों की कटाई करवाए लगभग 12 वर्ष बीत चुके हैं और दिन व दिन सूखे पेड़ों की संख्या बढ़ रही है। वहीं पेड़ों को नम्बरिंग लगाए भी 5 वर्ष बीत गए हैं और अनेक पेड़ों के नम्बर मिट चुके हैं जिसका फायदा वन माफिया उठा रहा है। सूखे पेड़ टूटने से महीनों तक सड़क किनारे ही पड़े रहते हैं क्योंकि विभाग द्वारा नजदीक कोई डिपो भी नहीं बनाया गया। विभाग अधिकारियों उदासीनता के कारण विभाग को वन माफिया लाखों रुपए का नुक्सान पहुंचा रहा है। वहीं सूत्रों की माने तो वन माफिया के लोग वन विभाग के कर्मचारियों के साथ सांठगांठ करके सूखे पेड़ों को काटकर बेचने का काम करते हैं और कालाधन कमा रहे हैं। जब इस संबंध में जिला वन अधिकारी से बात करनी चाही तो संपर्क नहीं हो सका।

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