लड़कियों की सेफ्टी के लिए योगी की राह पर चल सकती है खट्टर सरकार

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Thursday, April 20, 2017-8:20 AM

सिरसा (संजय अरोड़ा):प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन कल्याणकारी योजनाओं के बूते जहां कहा और दोहराया जा रहा है कि ‘मेरा देश बदल रहा है’ तो वहीं अब अन्य वर्गों के साथ-साथ विशेषकर प्रदेश की बेटियों के लिए मुख्यमंत्री खट्टर जिस लिहाज और रफ्तार से बेटी बचाओ के बाद बेटी पढ़ाओ के रूप में कदम आगे बढ़ा रहे हैं तो निश्चित ही कहना होगा कि ‘म्हारे प्रदेश’ का परिदृश्य वास्तव बदल रहा है। 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दूसरी तमाम योजनाओं के साथ साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ रूपी महत्वकांक्षी योजना को वास्तविक पंख लगाते हुए इस दिशा में अब नया प्रयोग करने की ओर अग्रसर हैं। खट्टर सरकार इस योजना के पहले चरण में बेटी को बचाने के लिए एडी चोटी का जोर लगाकर परिणामों को सार्थकता प्रदान की तो अब सुरक्षा के साथ साथ उसे पढ़ाने के लिए पूरी संजीदगी से प्लान बनाने में जुटी हुई है। सरकार ने अपना पूरा फोकस ‘बेटियों’ के लिए किया हुआ है और जिस लिहाज से बेटी बचाने के परिणामों से हरियाणा की पहचान पूरे देश में अलग रूप से बनी है तो माना यही जा रहा है कि बेटी पढ़ाने के मामले में भी सरकार नई मिसाल कायम करने का प्रयास करेगी। 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 में पानीपत में एक सम्मेलन के जरिए पूरे देश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाने का आह्वान किया था। इस अभियान की शुरूआत हरियाणा से होने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पूरी तन्मयता से पूरे देश को यही संदेश देने में कामयाब रहे कि दृढ़शक्ति का मजबूती से संचालन करने पर परिणाम भी सार्थक हासिल होते हैं। कारण साफ है कि अक्टूबर 2014 में मनोहर लाल खट्टर ने बतौर मुख्यमंत्री हरियाणा की कमान संभाली और इसके कुछ माह बाद ही प्रधानमंत्री द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को हरियाणा के पानीपत से ही पूरे देश को झंडी दिखाई तो यह मनोहर सरकार के लिए बड़ी चुनौती थी।

चूंकि इस सरकार से पूर्व हरियाणा में न तो बेटी सेफ फील कर रही थी तो न ही कोख में बेटी सुरक्षित थी। इसके अलावा पर्याप्त शिक्षा सुविधाएं न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के कदमों को एक डोर ने बांधे रखा जिससे पढ़ाई का अनुपात भी घटता चला गया। मगर खट्टर सरकार की संजीदगी का ही परिणाम ये रहा कि लिंगानुपात में पिछले वर्षों की तुलना में न केवल अभूतपूर्व सुधार हुआ, बल्कि हजार लड़कों के पीछे 950 के आंकड़े से देश में भी एक अलग पहचान बनी। जबकि यह अनुपात भाजपा सरकार से पूर्व एक हजार के पीछे महज 843 था।

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