बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, 6 वर्षों तक बिना मान्यता से चलता रहा स्कूल

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Wednesday, September 20, 2017-5:53 PM

​फतेहाबाद(रमेश भट्ट): भले की गुरुग्राम के रेयान स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की मौत के बाद सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों पर नियमों को पूरा करने की लाठी चलाई जा रही हो लेकिन फतेहाबाद में एक स्कूल कई वर्षों से बिना मान्यता के चल रहा था। फतेहाबाद में बिना मान्यता से कई वर्षों तक स्कूल चलाकर अभिभावकों के साथ ठगी की जा रही थी। जब अभिवावकों ने एसएलसी की मांग की तो मामले का खुलासा हुआ। 

स्कूल संचालकों द्वारा किया जा रहा बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
फतेहाबाद में अपैक्स स्कूल के संचालकों पर बिना मान्यता के स्कूल को चलाने और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के आरोप लगे हैं। जिसके बाद बच्चों के अभिभावकों की ओर से मामले की शिकायत शिक्षा विभाग से की गई, लेकिन कई महीनों तक विभाग की ओर से मामले को दबाकर रखा गया। अब जब अभिभावकों की ओर से लगातार मामले की पैरवी की जा रही है तो शिक्षा विभाग की ओर से जांच को आगे बढ़ाया गया है। 

डीसी की अध्यक्षता में होगी जांच
जांच के दौरान जब शिक्षा विभाग ने अपैक्स स्कूल संचालकों ने स्कूल की मान्यता संबधी दस्तावेज मांगें तो स्कूल संचालकों ने दस्तावेज देने से मना कर दिया। जिसके बाद अब शिक्षा विभाग की ओर से निदेशालय को पत्र लिखकर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने और जांच में सहयोग नहीं करने की बात कही गई है। निदेशालय ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए पूरे मामले की जांच डीसी की अध्यक्षता में करवाने के आदेश शिक्षा विभाग को दिए हैं। 
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आरटीआई लगाकर इकट्ठा किए दस्तावेज
फतेहाबाद के रहने वाले एडवोकेट राजेश कुमार ने आरोप लगाया कि 2010 से लेकर 2016 तक उसके बच्चे अपैक्स स्कूल में ही पढ़े। जब उसकी अोर से स्कूल से मान्यता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आईसीआईसी पेटर्न की मान्यता भरोसा दिया। वर्ष 2016 में जब स्कूल से बच्चों के सार्टिफिकेट मांगें गए तो वह अपैक्स पब्लिक स्कूल के थे। जिसके बाद राजेश कुमार की ओर से स्कूल पर आरटीआई लगाकर दस्तावेज एकत्र किए गए तो सामने आया कि स्कूल की मान्यता के नाम पर स्कूल मैनेजमेंट अपैक्स कांवेट स्कूल का संचालन भी कर रही है। जिसके बाद स्कूल ने राजेश के बच्चों को एसएलसी देने से मना कर दिया लेकिन बीईओ के हस्तक्षेप के बाद बच्चों को इंग्जाम दिलवा दिए गए। 
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2010 से 2016 तक स्कूल के पास नहीं थी मान्यता
शिकायकर्ता राजेश कुमार ने बताया कि अपैक्स कांवेट स्कूल के पास वर्ष 2010 से लेकर 2016 तक कोई मान्यता नहीं थी। अब अप्रैल 2017 में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत करके स्कूल को हरियाणा बोर्ड की मान्यता दिलवाई है जब कि नियम के अनुसार किसी भी पैडिंग जांच के दौरान स्कूल को मान्यता नहीं दी जा सकती। वहीं स्कूल के पास फायर की एनओसी भी नहीं है ऐसे में उसे कैसे मान्यता दी जा सकती है। राजेश कुमार का कहना है कि इस स्कूल की प्रिंसिपल मंजू मेहता चाईल्ड वेल्फेयर कमेटी की चैयरपर्सन है, ऐसे में अभिभावक सुनवाई के लिए कहां जाए। राजेश ने मामले मे स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। राजेश का कहना है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से उस पर लगातार दवाब भी बनाया जा रहा है।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संगीता बिश्नोई के मुताबिक बार-बार रिमाइंडर नोटिस देने पर भी स्कूल की ओर से जांच में सहयोग नहीं किया गया। जिसके बाद मामले की जानकारी निदेशालय को दी गई। निदेशालय की ओर से अब इस मामले में डीसी की अध्यक्षता मे जांच कमेटी बनाकर स्कूल पर कार्रवाई करने की बात कही गई है। जांच में इतना समय लगने का सवाल जब अधिकारियों से किया गया तो उनका कहना था कि उनकी पोस्टिंग अभी कुछ दिन पहले ही हुई है। इस मामले में कई बार स्कूल प्रबंधकों से संपर्क करने के बाद स्कूल कमेटी के डायरेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि उनके स्कूल पर लगे सभी आरोप गलत है। स्कूल की ओर से जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
 

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